संसद ने औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक 2026 पारित किया, जिसमें तीन ऐतिहासिक श्रम कानूनों — व्यापार संघ अधिनियम 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946, और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 — के निरस्त होने की तिथि 21 नवंबर 2025 को आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया गया। चारों श्रम संहिताएं उसी दिन से प्रभावी हो गई थीं।

यह संशोधन पुराने कानूनों की निरस्ति की सटीक तिथि पर चल रही कानूनी अनिश्चितता को दूर करने के लिए लाया गया। नियोक्ताओं और ट्रेड यूनियनों को नई समेकित व्यवस्था में जाने के दौरान यह अस्पष्टता परेशानी का कारण बन रही थी। औद्योगिक संबंध संहिता 2020, चार श्रम संहिताओं में से एक है — अन्य तीन हैं मजदूरी संहिता 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता 2020। ये चारों मिलकर 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को एकीकृत करती हैं।

विपक्ष ने बहस के दौरान आरोप लगाया कि यह विधेयक श्रमिकों की छंटनी को आसान बनाता है, क्योंकि औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अंतर्गत 100 से अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में सरकारी अनुमति के बिना छंटनी नहीं हो सकती थी। सरकार ने तर्क दिया कि नई संहिताएं श्रमिकों के मूल अधिकार सुरक्षित रखती हैं और भारत की श्रम नियामक प्रणाली को आधुनिक बनाती हैं।

2019 में मजदूरी संहिता के साथ शुरू हुई यह विधायी समेकन प्रक्रिया अब पूर्ण हो गई है। चार श्रम संहिताओं से व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम होगा, विवाद समाधान की गति बढ़ेगी और गिग व प्लेटफ़ॉर्म कर्मकारों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिलेगा।