प्रकाशित: 6 मार्च 2026विज्ञान-प्रौद्योगिकी
BEL और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने वेरी लो अर्थ ऑर्बिट उपग्रह सिस्टम के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने अति निम्न पृथ्वी कक्षा (VLEO) में काम करने वाली उपग्रह प्रणालियाँ विकसित करने के लिए बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी में अगली पीढ़ी के VLEO उपग्रहों के लिए BEL की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण विशेषज्ञता को बेलाट्रिक्स की विद्युत प्रणोदन तकनीक से जोड़ा जाएगा।
VLEO उपग्रह मोटे तौर पर 100-450 किमी की ऊँचाई पर काम करते हैं। पारंपरिक निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) के उपग्रहों की तुलना में इनसे अधिक सूक्ष्म विवरण वाले चित्र मिलते हैं और संचार में कम देर लगती है। यह सहयोग भारत की बढ़ती अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के अनुरूप है, जिसके 2040 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। नवरत्न दर्जा प्राप्त रक्षा सार्वजनिक उपक्रम BEL ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग ₹26,750 करोड़ का अनंतिम, गैर-अंकेक्षित कारोबार दर्ज किया। यह साझेदारी रक्षा और नागरिक, दोनों तरह के अंतरिक्ष उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
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भारत के पहले एकीकृत निजी उपग्रह संयंत्र 'पलमनारो', जिसकी आधारशिला जनवरी 2026 में रखी गई, किस राज्य में है?
व्याख्या · सही उत्तर Cपलमनारो संयंत्र गुजरात के साणंद में स्थित है। News On AIR ने इसे भारत का पहला एकीकृत निजी उपग्रह संयंत्र बताया, जहां निजी क्षेत्र द्वारा उपग्रहों और उन्नत ऑप्टिकल पेलोड के स्वदेशी निर्माण पर काम होना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने किस उद्देश्य से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए?
**भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)** ने **अति निम्न पृथ्वी कक्षा (VLEO) में काम करने वाली उपग्रह प्रणालियाँ** विकसित करने के लिए **बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस** के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसमें अगली पीढ़ी के उपग्रहों के लिए BEL की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण विशेषज्ञता को बेलाट्रिक्स की **विद्युत प्रणोदन तकनीक** से जोड़ा जाएगा।
अति निम्न पृथ्वी कक्षा (VLEO) का उपग्रह क्या होता है और यह कितनी ऊँचाई पर काम करता है?
**अति निम्न पृथ्वी कक्षा (VLEO) के उपग्रह** मोटे तौर पर **100-450 किमी की ऊँचाई** पर काम करते हैं। यह पारंपरिक निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) के उपग्रहों से कम ऊँचाई है। इनसे **अधिक सूक्ष्म विवरण वाले चित्र** मिलते हैं और **संचार में कम देर** लगती है। इसलिए ये विस्तृत चित्रों और तत्काल संचार की ज़रूरत वाले उपयोगों के लिए उपयुक्त हैं।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का वित्तीय प्रदर्शन कैसा है और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस के साथ उपग्रह समझौते के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
**भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)** **नवरत्न दर्जा प्राप्त रक्षा सार्वजनिक उपक्रम** है। इसने **वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग ₹26,750 करोड़ का अनंतिम, गैर-अंकेक्षित कारोबार** दर्ज किया। इसकी वित्तीय मजबूती और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण विशेषज्ञता इसे अति निम्न पृथ्वी कक्षा (VLEO) में काम करने वाली उपग्रह प्रणालियाँ विकसित करने में बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस का प्रमुख साझेदार बनाती है। इस साझेदारी से भारत की उस अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अवसरों का लाभ उठाया जा सकेगा, जिसके **2040 तक 100 अरब डॉलर** तक पहुँचने का अनुमान है।
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार क्या है और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस का उपग्रह समझौता इससे कैसे जुड़ा है?
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के **2040 तक 100 अरब डॉलर** तक पहुँचने का अनुमान है। **अति निम्न पृथ्वी कक्षा (VLEO) में काम करने वाली उपग्रह प्रणालियों के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस का समझौता ज्ञापन** इसी वृद्धि के अनुरूप है। इसमें BEL की घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता को बेलाट्रिक्स की नई अंतरिक्ष प्रणोदन तकनीक से जोड़ा गया है। इससे लगातार बढ़ते वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमताएँ मजबूत होंगी।
अति निम्न पृथ्वी कक्षा के उपग्रहों से जुड़ी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की साझेदारी में बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस कौन-सी तकनीक उपलब्ध कराएगी?
**बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस**, **भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)** के साथ **अति निम्न पृथ्वी कक्षा (VLEO) में काम करने वाली उपग्रह प्रणालियाँ** विकसित करने की साझेदारी में अपनी **विद्युत प्रणोदन तकनीक** उपलब्ध कराएगी। **100-450 किमी की ऊँचाई** पर काम करने वाले VLEO उपग्रहों से अधिक सूक्ष्म विवरण वाले चित्र मिलते हैं और संचार में कम देर लगती है। विद्युत प्रणोदन इतनी कम और चुनौतीपूर्ण ऊँचाई पर उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षीय स्थिति में कुशलता से बनाए रखने में मदद करता है।