प्रकाशित: 1 सितंबर 2025PIBअर्थव्यवस्था
भारतीय मानक ब्यूरो के IS 2112:2025 मानक के तहत विशिष्ट पहचान (HUID) वाली स्वैच्छिक चाँदी हॉलमार्किंग शुरू
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 1 सितंबर 2025 से नए मानक BIS IS 2112:2025 के तहत चाँदी के आभूषणों और वस्तुओं के लिए स्वैच्छिक हॉलमार्किंग योजना शुरू की है। यह चाँदी के आभूषणों और अन्य वस्तुओं की शुद्धता तथा उनके स्रोत का पता लगाने में मदद करेगी और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करेगी।
इस योजना के तहत हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (HUID) प्रणाली को चाँदी के क्षेत्र में भी अपनाया गया है। यह प्रणाली सोने की हॉलमार्किंग में पहले से सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रही है। हॉलमार्क की गई चाँदी की हर वस्तु पर अंकों और अक्षरों से बना छह वर्णों का HUID कोड अंकित होगा। उपभोक्ता BIS Care मोबाइल ऐप से उस वस्तु की शुद्धता, परीक्षण केंद्र और जौहरी की जानकारी जाँच सकेंगे।
IS 2112:2025 के तहत चाँदी की सात मान्य शुद्धता श्रेणियाँ 800, 835, 925, 958, 970, 990 और 999 हैं। इन्हें प्रति हज़ार शुद्धता के रूप में व्यक्त किया जाता है। ये श्रेणियाँ अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं, इसलिए भारतीय चाँदी की वस्तुएँ वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं।
फिलहाल योजना स्वैच्छिक है, लेकिन जिस चाँदी की वस्तु की हॉलमार्किंग की जाएगी, उस पर HUID अंकित करना अनिवार्य होगा। BIS ने छह माह बाद अनिवार्य अनुपालन की समीक्षा करने का संकेत दिया है। इस चरणबद्ध व्यवस्था से जौहरियों, निर्माताओं और निर्यातकों को BIS में पंजीकरण कराने, परीक्षण सुविधाएँ बेहतर करने और HUID अंकन की प्रक्रिया अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
हॉलमार्किंग के लिए चाँदी की वस्तुएँ BIS से मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्रों (AHC) में भेजी जाती हैं। वहाँ एक्स-रे प्रतिदीप्ति (XRF) या अग्नि-परख विधि से उनकी शुद्धता जाँची जाती है। परीक्षण में सफल होने पर HUID तैयार करके वस्तु पर अंकित किया जाता है।
राजस्थान, खासकर जयपुर, चाँदी के आभूषणों का एक प्रमुख केंद्र है। इसलिए इस नीति का राज्य के लिए विशेष आर्थिक महत्त्व है। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, मिलावट घटेगी और प्रमाणित चाँदी की वस्तुओं के निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 1 सितंबर 2025 से प्रभावी भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के IS 2112:2025 मानक के तहत हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (HUID) वाली स्वैच्छिक चाँदी हॉलमार्किंग उपभोक्ता संरक्षण और जयपुर के चाँदी आभूषण उद्योग की निर्यात प्रतिस्पर्धा को कैसे मजबूत करती है?
उत्तर (50 शब्द):
1 सितंबर 2025 से BIS ने IS 2112:2025 के तहत 800, 835, 925, 958, 970, 990 और 999 की सात शुद्धता श्रेणियों में स्वैच्छिक चाँदी हॉलमार्किंग शुरू की। BIS Care से जाँचे जा सकने वाले छह वर्णों के HUID कोड शुद्धता का भरोसा बढ़ाते और मिलावट घटाते हैं। छह माह बाद अनुपालन की समीक्षा होगी। प्रमाणित वस्तुओं से जयपुर की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयप्रकारयोजनाविषयआर्थिकपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतPIB
यह टॉपिक में दिखता है
Tऔद्योगिक विकास एवं आर्थिक सुधार
Tलोक नीति एवं शिकायत निवारण
Tआर्थिक एवं राजनीतिक विकास
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चाँदी की हॉलमार्किंग में हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (HUID) क्या है?
हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (HUID) अंकों और अक्षरों से बना छह वर्णों का कोड है, जिसे हॉलमार्क की गई चाँदी की वस्तु पर अंकित किया जाता है। उपभोक्ता BIS Care मोबाइल ऐप से उसकी शुद्धता और जौहरी की जानकारी जाँच सकते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो के IS 2112:2025 मानक के तहत कौन-सी शुद्धता श्रेणियाँ मान्य हैं?
सात मान्य शुद्धता श्रेणियाँ 800, 835, 925, 958, 970, 990 और 999 हैं। इन्हें प्रति हज़ार शुद्धता के रूप में व्यक्त किया जाता है।
क्या चाँदी की हॉलमार्किंग योजना अनिवार्य है?
नहीं। 1 सितंबर 2025 से इस योजना में भाग लेना स्वैच्छिक है, लेकिन जिस चाँदी की वस्तु की हॉलमार्किंग की जाएगी, उस पर HUID अंकित करना अनिवार्य होगा। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) छह माह बाद अनिवार्य अनुपालन की समीक्षा करेगा।
इस योजना के तहत चाँदी की शुद्धता कैसे जाँची जाती है?
चाँदी की शुद्धता भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से मान्यता प्राप्त परख और हॉलमार्किंग केंद्रों (AHC) में एक्स-रे प्रतिदीप्ति (XRF) या अग्नि-परख विधि से जाँची जाती है।
इस योजना का राजस्थान के लिए क्या महत्त्व है?
राजस्थान, खासकर जयपुर, चाँदी के आभूषणों का एक प्रमुख केंद्र है। हॉलमार्क विशिष्ट पहचान (HUID) से उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा, मिलावट घटेगी और प्रमाणित चाँदी की वस्तुएँ निर्यात बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी।