केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 दिसंबर 2025 को असम के नागांव जिले के बोरदुवा गांव में पुनर्विकसित बटद्रवा थान का उद्घाटन किया। इस परिसर को महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव आविर्भाव क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है। परियोजना पर ₹222 करोड़ से अधिक खर्च हुआ और यह 162 बीघा भूमि में फैली है। परिसर में 25 मीटर ऊंचा गुरु आसन, सांस्कृतिक परिसर और सत्रिया नृत्य प्रदर्शन के लिए स्थान शामिल हैं।

बटद्रवा थान 15वीं सदी के वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव (1449-1568) का जन्मस्थान है। उन्होंने असम में एकशरण धर्म और सत्र परंपरा की स्थापना की। इसलिए यह स्थान केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक पहचान, भक्ति परंपरा और सामाजिक सुधार की धारा से जुड़ा हुआ है। आधिकारिक विवरण के अनुसार निर्माण तीन चरणों में हुआ और नव-वैष्णव परंपरा से जुड़े प्रतीकों को परिसर में रूप दिया गया।

परीक्षा के दृष्टिकोण से यह विषय संस्कृति, शासन और विरासत संरक्षण को जोड़ता है। प्रारंभिक परीक्षा में स्थान, जिला, परियोजना लागत, भूमि क्षेत्र, गुरु आसन, सत्रिया नृत्य और श्रीमंत शंकरदेव से जुड़े तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, क्षेत्रीय पहचान, तीर्थ-पर्यटन और राज्य-समर्थित सांस्कृतिक अवसंरचना के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। स्टैटिक जीके में शंकरदेव, एकशरण धर्म, सत्र परंपरा और असम की वैष्णव परंपरा का संबंध इस समसामयिकी से सीधे जुड़ता है।