प्रकाशित: 27 सितंबर 2025ISROविज्ञान-प्रौद्योगिकी
इसरो के ऐस्ट्रोसैट ने कक्षा में 10 वर्ष पूरे किए — भारत की पहली बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला
भारत की पहली समर्पित बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष खगोल विज्ञान वेधशाला ऐस्ट्रोसैट ने 28 सितंबर 2025 को कक्षा में 10 वर्ष पूरे किए। 28 सितंबर 2015 को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी30 (एक्सएल) रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित यह उपग्रह अपने 5 वर्ष के निर्धारित मिशन जीवन से बहुत आगे निकल चुका है और वैज्ञानिक डेटा देता रहा है।
ऐस्ट्रोसैट एक ही वेधशाला से विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य, पराबैंगनी, निम्न-ऊर्जा और उच्च-ऊर्जा एक्स-रे क्षेत्रों में एक साथ अवलोकन कर सकता है। 10 वर्षों में इसके आधार पर 500 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशन सामने आए हैं। इसकी प्रमुख खोजों में लगभग 9 अरब प्रकाश-वर्ष दूर से सुदूर-पराबैंगनी फोटॉन का पता लगाना तथा बटरफ्लाई नेबुला के उत्सर्जन को पहले ज्ञात आकार से तीन गुना अधिक विस्तृत दिखाना शामिल है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: इसरो के ऐस्ट्रोसैट के कक्षा में एक दशक पूरा करने के वैज्ञानिक महत्व, इसकी बहु-तरंगदैर्ध्य क्षमता एवं प्रमुख खगोलीय योगदान पर प्रकाश डालें।
उत्तर (50 शब्द):
ऐस्ट्रोसैट भारत की पहली बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला है। 2015 में पीएसएलवी-सी30 से प्रक्षेपण के बाद इसने 28 सितंबर 2025 को कक्षा में दस वर्ष पूरे किए। पाँच-वर्षीय डिज़ाइन जीवन से दोगुना चलकर इसने 500 से अधिक प्रकाशन और 2,000 अवलोकन प्रस्ताव दिए। प्रमुख खोजों में नौ अरब प्रकाश-वर्ष दूर के दूर-पराबैंगनी फोटॉन शामिल हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतISRO
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नमध्यम
ISRO के पुष्पक RLV को पुनः प्रवेश के दौरान कितना तापमान झेलना होगा?
व्याख्या · सही उत्तर Cइसरो पुष्पक यान में सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट का परीक्षण कर रहा है, ताकि पुनः प्रवेश के समय वह 2000+ °C ताप सह सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एस्ट्रोसैट ने कक्षा में 10 वर्ष कब पूरे किए?
**ऐस्ट्रोसैट**, भारत की पहली बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष वेधशाला, ने **28 सितंबर 2025** को कक्षा में **10 वर्ष** पूरे किए। इसे इसरो ने 28 सितंबर 2015 को पीएसएलवी-सी30 रॉकेट से श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया था।
एस्ट्रोसैट क्या है और यह क्यों विशेष है?
**एस्ट्रोसैट** भारत की पहली समर्पित **बहु-तरंगदैर्ध्य अंतरिक्ष खगोल वेधशाला** है जिसे इसरो ने 2015 में लॉन्च किया। यह एक साथ **पराबैंगनी, ऑप्टिकल, निम्न और उच्च ऊर्जा एक्स-रे** तरंगों में खगोलीय पिंडों का अध्ययन कर सकता है।
इसरो के एस्ट्रोसैट ने क्या प्रमुख खोजें की हैं?
**एस्ट्रोसैट** ने **पल्सार, ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारों** और दूर की आकाशगंगाओं का अध्ययन करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेष रूप से, इसने **9.3 अरब प्रकाश-वर्ष दूर एक आकाशगंगा से पराबैंगनी प्रकाश** का पता लगाया।
एस्ट्रोसैट को किस रॉकेट से और कहाँ से लॉन्च किया गया था?
**एस्ट्रोसैट** को इसरो ने **28 सितंबर 2015** को **पीएसएलवी-सी30** रॉकेट से **सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा** से लॉन्च किया था। इसे 650 किमी की वृत्ताकार कक्षा में स्थापित किया गया।
एस्ट्रोसैट कितने समय से परिचालन में है?
**एस्ट्रोसैट** सितंबर 2025 तक **10 वर्षों** से काम कर रहा है, जो इसकी शुरुआती निर्धारित आयु से काफी अधिक है। इसरो का यह खगोल विज्ञान उपग्रह वैश्विक खगोल भौतिकी अनुसंधान में योगदान देता रहा है।