प्रकाशित: 25 फ़रवरी 2026PIBअंतरराष्ट्रीय
भारत और फ्रांस ने द्विपक्षीय कर संधि संशोधन प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, वैश्विक BEPS मानकों के अनुरूप
23 फरवरी 2026 को भारत सरकार ने बताया कि भारत और फ्रांस की सरकारों ने 29 सितंबर 1992 को हस्ताक्षरित द्विपक्षीय कर परिहार संधि (DTAC/DTAA) में संशोधन के लिए एक प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, जिससे कर प्रावधानों को आधुनिक बनाया गया और OECD/G20 द्वारा विकसित वैश्विक आधार क्षरण और लाभ स्थानांतरण (BEPS) मानकों के अनुरूप किया गया।
संशोधन में संधि दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रिंसिपल पर्पज टेस्ट (PPT), डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए स्थायी प्रतिष्ठान (PE) की परिभाषाओं में संशोधन, और विवाद समाधान के लिए पारस्परिक समझौता प्रक्रियाओं (MAP) पर प्रावधान शामिल हैं। भारत-फ्रांस द्विपक्षीय व्यापार लगभग 13 अरब यूरो वार्षिक है। राजस्थान की दृष्टि से, नवीकरणीय ऊर्जा में फ्रांसीसी निवेश — विशेषकर सौर — महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजस्थान 20 गीगावाट से अधिक स्थापित क्षमता के साथ भारत का अग्रणी सौर ऊर्जा राज्य है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 1992 की द्विपक्षीय कर परिहार संधि में संशोधन करने वाले भारत-फ्रांस प्रोटोकॉल के महत्व तथा ओईसीडी बीईपीएस मानकों से इसके संरेखण का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
26 फरवरी 2026 के आसपास हस्ताक्षरित प्रोटोकॉल 1992 भारत-फ्रांस डीटीएसी को प्रमुख प्रयोजन परीक्षण, स्थायी प्रतिष्ठान की नई परिभाषाओं एवं पारस्परिक समझौता प्रक्रियाओं से आधुनिक बनाता है; ओईसीडी बीईपीएस एवं बहुपक्षीय लिखत के अनुरूप यह लगभग 13 अरब यूरो के वार्षिक व्यापार को कर-निश्चितता देता है और राजस्थान के 20 गीगावाट सौर क्षेत्र के लिए मददगार है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत और फ्रांस ने अपनी द्विपक्षीय कर परिहार संधि (DTAC) में संशोधन प्रोटोकॉल पर कब हस्ताक्षर किए?
भारत और फ्रांस ने फरवरी 2026 के अंत में अपनी 1992 की DTAC में संशोधन प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। यह संशोधन OECD/G20 BEPS (आधार क्षरण और लाभ स्थानांतरण) मानकों के अनुरूप है।
भारत-फ्रांस DTAC संशोधन में शामिल प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट (PPT) क्या है?
प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट (PPT) OECD BEPS मानकों के तहत कर-परिहार रोकने वाला प्रावधान है। इसके तहत किसी लेन-देन का मुख्य उद्देश्य कर लाभ लेना हो, तो संधि के लाभ नहीं दिए जाते। यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों को केवल कर से बचने के लिए संधि का दुरुपयोग करने से रोकता है।
BEPS क्या है और भारत की कर संधियों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BEPS का अर्थ है आधार क्षरण और लाभ स्थानांतरण। यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा कर परिहार रोकने की OECD/G20 पहल है। भारत ने संधि दुरुपयोग रोकने और वैश्विक मानकों के अनुरूप कई देशों के साथ अपनी DTAA में संशोधन किए हैं।
भारत और फ्रांस के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार लगभग कितने का है?
भारत और फ्रांस के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार लगभग €13 अरब है। संशोधित DTAC प्रोटोकॉल से दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह पर असर पड़ने और व्यवसायों को कर के मामले में अधिक निश्चितता मिलने की उम्मीद है।
कर संधियों के संदर्भ में पारस्परिक सहमति प्रक्रिया (MAP) क्या है?
पारस्परिक सहमति प्रक्रिया (MAP) कर संधियों में विवाद समाधान तंत्र है। इसके तहत दो देशों के सक्षम प्राधिकारी दोहरे कराधान या संधि विवादों को सुलझा सकते हैं। भारत-फ्रांस DTAC संशोधन में MAP प्रावधानों को BEPS एक्शन प्लान 14 के अनुरूप संशोधित किया गया।