11 मार्च 2026 की समसामयिकी में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा ऊर्जा-सुरक्षा मुद्दा भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति बनी, इसलिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्राकृतिक गैस का आवंटन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ने का निर्देश दिया। इसमें घरेलू उपयोग और परिवहन क्षेत्र शामिल रहे। परीक्षा की दृष्टि से यह तथ्य इसलिए अहम है कि ऊर्जा आपूर्ति केवल बाजार का मामला नहीं रहती; संकट के समय सरकार को परिवारों की रसोई, शहरी परिवहन और आवश्यक सेवाओं जैसी मांगों को प्राथमिकता देनी पड़ती है।

इसी अवधि में भारत का रूसी तेल आयात मार्च के पहले 11 दिनों में 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। यह दिखाता है कि पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित होने पर भारत ने वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई। अर्थव्यवस्था के पेपर में इसे ऊर्जा आयात, चालू खाता, महंगाई, ईंधन कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला जोखिम से जोड़ा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय संबंध में यह पश्चिम एशिया, रूस और भारत की ऊर्जा कूटनीति से जुड़ता है।

स्टैटिक जीके के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को एक प्रमुख ऊर्जा चोकपॉइंट के रूप में याद रखना चाहिए। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार 2024 में इस मार्ग से औसतन 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल प्रवाह हुआ, जो वैश्विक पेट्रोलियम तरल खपत का करीब 20% था। इसलिए ऐसी किसी भी बाधा का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की ऊर्जा योजना और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ता है।