विशेषज्ञों ने डिजिटल संविधानवाद के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया — यानी डिजिटल क्षेत्र में स्वतंत्रता, गोपनीयता और समानता के संवैधानिक सिद्धांतों को लागू करना। 2017 के पुट्टस्वामी निर्णय (गोपनीयता का अधिकार मौलिक अधिकार) और EU के GDPR (2018) के बाद यह अवधारणा अधिक चर्चा में आई।

भारत में प्रमुख चुनौतियों में IT अधिनियम 2000 और टेलीग्राफ अधिनियम के तहत अनियंत्रित निगरानी, कमजोर सहमति तंत्र और AI प्रणालियों में एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह शामिल हैं। भारत का DPDP अधिनियम 2023 कुछ चिंताओं पर ध्यान देता है, लेकिन आधुनिक निगरानी कानून और एल्गोरिदम विनियमन का अभाव है।