गृह मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2025 को लोकसभा को बताया कि केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड में राष्ट्रीय हिमनद झील प्रकोप बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण परियोजना को 150 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। यह परियोजना संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में हिमनद झील प्रकोप बाढ़ से जुड़े जोखिम घटाने के लिए है।

परियोजना का उद्देश्य जनहानि रोकना, आर्थिक नुकसान कम करना और महत्वपूर्ण अवसंरचना को हिमनद झील प्रकोप बाढ़ तथा ऐसी ही घटनाओं से बचाना है। इसके उद्देश्यों में अंतिम छोर तक संचार के साथ पूर्व चेतावनी और निगरानी क्षमता को मजबूत करना, स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता बढ़ाना तथा स्वदेशी ज्ञान के साथ वैज्ञानिक न्यूनीकरण उपायों का उपयोग शामिल है।

परियोजना में दूरसंवेदी आंकड़ों, सामुदायिक निगरानी और अलर्ट प्रसार पर आधारित निगरानी तथा पूर्व चेतावनी प्रणाली शामिल है। सरकार ने संसद को यह भी बताया कि सिक्किम में दो स्वचालित मौसम स्टेशन लगाए गए हैं और आगे के पूर्व चेतावनी उपकरण सी-डैक, इसरो तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद के सहयोग से लगाए जाने की योजना है।

अन्य आधिकारिक उपायों में केंद्रीय जल आयोग द्वारा 902 हिमनद झीलों और जल निकायों की निगरानी, हिमनद झीलों की जोखिम अनुक्रमण पद्धति, तथा उच्च जोखिम वाली झीलों के प्रत्यक्ष आकलन और न्यूनीकरण योजना के लिए हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का समन्वय शामिल है।