प्रकाशित: 31 अक्टूबर 2025IMD/PIBविज्ञान-प्रौद्योगिकी
राष्ट्रीय हिमनद झील प्रकोप बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण परियोजना से हिमालयी क्षेत्र में पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत हुई
गृह मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2025 को लोकसभा को बताया कि केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड में राष्ट्रीय हिमनद झील प्रकोप बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण परियोजना को 150 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। यह परियोजना संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में हिमनद झील प्रकोप बाढ़ से जुड़े जोखिम घटाने के लिए है।
परियोजना का उद्देश्य जनहानि रोकना, आर्थिक नुकसान कम करना और महत्वपूर्ण अवसंरचना को हिमनद झील प्रकोप बाढ़ तथा ऐसी ही घटनाओं से बचाना है। इसके उद्देश्यों में अंतिम छोर तक संचार के साथ पूर्व चेतावनी और निगरानी क्षमता को मजबूत करना, स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता बढ़ाना तथा स्वदेशी ज्ञान के साथ वैज्ञानिक न्यूनीकरण उपायों का उपयोग शामिल है।
परियोजना में दूरसंवेदी आंकड़ों, सामुदायिक निगरानी और अलर्ट प्रसार पर आधारित निगरानी तथा पूर्व चेतावनी प्रणाली शामिल है। सरकार ने संसद को यह भी बताया कि सिक्किम में दो स्वचालित मौसम स्टेशन लगाए गए हैं और आगे के पूर्व चेतावनी उपकरण सी-डैक, इसरो तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद के सहयोग से लगाए जाने की योजना है।
अन्य आधिकारिक उपायों में केंद्रीय जल आयोग द्वारा 902 हिमनद झीलों और जल निकायों की निगरानी, हिमनद झीलों की जोखिम अनुक्रमण पद्धति, तथा उच्च जोखिम वाली झीलों के प्रत्यक्ष आकलन और न्यूनीकरण योजना के लिए हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का समन्वय शामिल है।
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6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिमनद झील प्रकोप बाढ़ (GLOF) क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
GLOF तब होता है जब बर्फ, मोरेन या चट्टानी बांधों के पीछे बनी कोई हिमनद झील अचानक टूट जाती है और बहुत बड़ी मात्रा में पानी तेज, विनाशकारी बहाव के साथ पहाड़ी घाटियों में उतरता है। भारत में 7,500+ हिमनद झीलें हैं, जिनमें से 188 को ISRO के NRSC ने संभावित रूप से खतरनाक श्रेणी में रखा है।
IMD की AI-आधारित बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली GLOF के लिए कितने घंटे पहले चेतावनी देती है?
EWS से जुड़ा IMD का AI-आधारित बाढ़ पूर्वानुमान मॉडल GLOF से आने वाली अचानक बाढ़ की 6–12 घंटे पहले भविष्यवाणी कर सकता है। इससे निचले इलाकों में रहने वाली आबादी को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए महत्त्वपूर्ण समय मिल जाता है।
ISRO उपग्रह IMD की GLOF पूर्व चेतावनी प्रणाली में क्या भूमिका निभाते हैं?
ISRO के Cartosat और Resourcesat उपग्रह हिमनद झीलों की वास्तविक समय निगरानी के लिए तस्वीरें उपलब्ध कराते हैं, जिन्हें IMD के EWS में जोड़ा गया है। यह रिमोट सेंसिंग डेटा झीलों के जलस्तर पर नजर रखने और झील फटने जैसी घटनाओं से पहले अधिकारियों को चेतावनी देने में मदद करता है।
हिमालयी GLOF और राजस्थान के बीच क्या संबंध है?
राजस्थान में चंबल नदी प्रणाली विंध्य से निकलती है, फिर भी हिमालयी बेसिनों की नदी प्रणालियों से जुड़ी चरम मानसूनी घटनाओं के दौरान इसके निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है। साथ ही, EWS मॉडल RSDMA के लिए आपदा तैयारी का एक नमूना ढांचा देता है।
2023 में किस GLOF घटना ने भारत के EWS विस्तार प्रयासों को गति दी?
सिक्किम की साउथ ल्होनक झील में हुआ GLOF (अक्टूबर 2023) एक बड़ी घटना थी, जिसमें 70 से अधिक लोग मारे गए और निचले इलाकों में भारी तबाही हुई। इसी ने सभी हिमालयी राज्यों में GLOF पूर्व चेतावनी प्रणाली का विस्तार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को और तेज किया।