प्रकाशित: 7 मार्च 2026समाचार स्रोतशासन
नीति आयोग और यूनिसेफ ने आकांक्षी जिलों में पोषण सुदृढ़ करने के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए
नीति आयोग और यूनिसेफ ने 5 मार्च 2026 को भारत के आकांक्षी जिलों में मातृ एवं शिशु पोषण सुदृढ़ करने के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसकी सूचना 6-7 मार्च को दी गई। इस आशय पत्र के तहत पोषण के लिए निवेश (I4N) के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) प्लेटफ़ॉर्म से निजी क्षेत्र के संसाधन देश के उन जिलों के पोषण कार्यक्रमों तक पहुँचाए जाएंगे, जहाँ बुनियादी सेवाओं की पहुँच सबसे कम है।
यह साझेदारी माताओं में एनीमिया घटाने और सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की पूर्ति करने; बच्चों में ठिगनापन, दुबलापन और कम वज़न की समस्या घटाने; आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA) और सहायक नर्स दाइयों (ANM) की क्षमता बढ़ाने; तथा समुदाय के स्तर पर पोषण संबंधी उपाय चलाने पर केंद्रित होगी।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) जनवरी 2018 में नीति आयोग के अंतर्गत शुरू हुआ। यह 28 राज्यों के उन 112 जिलों पर केंद्रित है, जो स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, वित्तीय समावेशन, कृषि और बुनियादी ढाँचे जैसे प्रमुख विकास संकेतकों में पीछे हैं। राजस्थान के 5 आकांक्षी जिले बारां, धौलपुर, जैसलमेर, करौली और सिरोही हैं।
यूनिसेफ भारत में पोषण, जल, स्वच्छता और साफ-सफाई (WASH), बाल संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्रों में काम करता है। I4N प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों से CSR धन जुटाकर पोषण से जुड़े विशेष उपायों के लिए उपलब्ध कराता है। इस तरह यह पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) और एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS) जैसे सरकारी कार्यक्रमों के साथ मिलकर काम करता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5), 2019-21 के अनुसार भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के 35.5% बच्चे ठिगने, 19.3% दुबले और 32.1% कम वज़न वाले हैं। राजस्थान में ठिगनेपन की दर 35.6% है, जो राष्ट्रीय औसत के करीब है, लेकिन राज्य के आकांक्षी और गैर-आकांक्षी जिलों के बीच काफी अंतर है। यह आशय पत्र सरकार, संयुक्त राष्ट्र की संस्था और निजी क्षेत्र के संसाधनों को साथ लाने वाली साझा पहल है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत के आकांक्षी जिला कार्यक्रम में पोषण की स्थिति सुधारने में नीति आयोग-यूनिसेफ आशय पत्र जैसी सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका का राजस्थान के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
5 मार्च 2026 को नीति आयोग और यूनिसेफ ने आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत पोषण के लिए निवेश (I4N) के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व प्लेटफ़ॉर्म से निजी क्षेत्र के संसाधन जुटाए जाएंगे और 112 आकांक्षी जिलों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA) तथा सहायक नर्स दाइयों (ANM) के ज़रिए मातृ एवं शिशु पोषण बेहतर किया जाएगा। यह 5 वर्ष से कम उम्र के 35.5% बच्चों में ठिगनापन घटाने पर केंद्रित है; राजस्थान के 5 जिलों को इन संसाधनों का सीधा लाभ मिलेगा।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीति आयोग और यूनिसेफ के बीच हस्ताक्षरित आशय पत्र किस बारे में है?
मार्च 2026 में हस्ताक्षरित यह आशय पत्र भारत के आकांक्षी जिलों में मातृ एवं शिशु पोषण सुदृढ़ करने के लिए है। इसके तहत पोषण के लिए निवेश (I4N) के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) प्लेटफ़ॉर्म से निजी क्षेत्र के संसाधन जुटाए जाएंगे और पोषण संबंधी उपायों के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA) तथा सहायक नर्स दाइयों (ANM) की क्षमता बढ़ाई जाएगी।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम क्या है?
नीति आयोग के अंतर्गत जनवरी 2018 में शुरू किया गया आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) 28 राज्यों के उन 112 जिलों पर केंद्रित है, जो स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, वित्तीय समावेशन, कृषि और बुनियादी ढाँचे जैसे प्रमुख विकास संकेतकों में पीछे हैं। यह कार्यक्रम प्रतिस्पर्धा और आँकड़ों पर आधारित है; प्रगति मासिक डेल्टा रैंकिंग से मापी जाती है। राजस्थान के 5 आकांक्षी जिले बारां, धौलपुर, जैसलमेर, करौली और सिरोही हैं।
पोषण के लिए निवेश (I4N) प्लेटफ़ॉर्म क्या है?
पोषण के लिए निवेश (I4N) एक कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) प्लेटफ़ॉर्म है, जो भारत में पोषण से जुड़े विशेष उपायों के लिए निजी क्षेत्र से धन जुटाता है। यह पोषण में निवेश करने वाली कंपनियों और संसाधनों की ज़रूरत वाले जिलों या कार्यक्रमों के बीच सेतु का काम करता है तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय का पूरक बनता है।
मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, सहायक नर्स दाई और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कौन हैं?
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की ज़रूरत पड़ने पर समुदाय सबसे पहले मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA) से संपर्क करता है। सहायक नर्स दाई (ANM) उप-केंद्र स्तर पर सरकार की ओर से नियुक्त कुशल प्रसव सहायक होती हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एकीकृत बाल विकास सेवाओं (ICDS) की मैदानी कार्यकर्ता होती हैं और पोषण, स्कूल-पूर्व शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाएँ देती हैं। मातृ एवं शिशु पोषण सेवाओं में इन तीनों की केंद्रीय भूमिका है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार भारत में बच्चों के पोषण के प्रमुख संकेतक क्या हैं?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5), 2019-21 के अनुसार भारत में 5 वर्ष से कम उम्र के 35.5% बच्चे ठिगने हैं, यानी उनकी लंबाई उम्र के अनुसार कम है; 19.3% बच्चे दुबले हैं, यानी उनका वज़न लंबाई के अनुसार कम है; और 32.1% बच्चे कम वज़न वाले हैं। राजस्थान में ठिगनेपन की दर लगभग 35.6% है। यह राष्ट्रीय औसत के करीब है, लेकिन राज्य के आकांक्षी और गैर-आकांक्षी जिलों के बीच काफी अंतर है।