प्रकाशित: 14 अक्टूबर 2025PIBअर्थव्यवस्था
खनन मंत्रालय ने चूना पत्थर को पूरी तरह प्रमुख खनिज के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया
खनन मंत्रालय ने 10 अक्टूबर 2025 की राजपत्र अधिसूचना से खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत चूना पत्थर को पूरी तरह प्रमुख खनिज के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया और अंतिम उपयोग के आधार पर होने वाले दोहरे वर्गीकरण को समाप्त कर दिया। पहले, भवन निर्माण सामग्री के रूप में चूने के निर्माण के लिए भट्ठों में प्रयुक्त चूना पत्थर गौण खनिज था, जबकि सीमेंट, रसायन और इस्पात के लिए प्रयुक्त चूना पत्थर प्रमुख खनिज था।
MMDR अधिनियम की धारा 20A के तहत 13 अक्टूबर 2025 के आदेश से चूना पत्थर के मौजूदा गौण खनिज पट्टों का सुचारू संक्रमण सुनिश्चित किया गया। मौजूदा पट्टाधारकों को IBM में पंजीकरण के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय दिया गया है। भारत के सिद्ध चूना पत्थर भंडार का लगभग 26% (करीब 2.5 अरब टन) राजस्थान में है, इसलिए इससे राजस्थान को महत्वपूर्ण लाभ होगा क्योंकि राजस्थान पहले से ही भारत के प्रमुख सीमेंट और सीमेंट-ग्रेड चूना पत्थर राज्यों में शामिल है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: खान एवं खनिज अधिनियम, 1957 के तहत चूना-पत्थर को पूर्णतः प्रमुख खनिज के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने के खनन मंत्रालय के निर्णय के भारत के खनन तंत्र एवं राजस्थान के सीमेंट-उद्योग पर प्रभावों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
10 अक्टूबर 2025 की राजपत्र अधिसूचना से खनन मंत्रालय ने खान एवं खनिज अधिनियम 1957 के अंतर्गत चूना-पत्थर को पूर्णतः प्रमुख खनिज के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया और पूर्व दोहरी व्यवस्था समाप्त की। 13 अक्टूबर के धारा 20क आदेश ने पट्टा-परिवर्तन आसान किया; धारकों के लिए 31 मार्च 2026 तक भारतीय खान ब्यूरो पंजीकरण अनिवार्य है। 26 प्रतिशत भंडार वाला राजस्थान लाभान्वित होगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खान मंत्रालय ने चूना पत्थर के वर्गीकरण में क्या बदलाव किया?
**खान मंत्रालय** ने **10 अक्टूबर 2025 की राजपत्र अधिसूचना** से MMDR अधिनियम, 1957 के तहत **चूना पत्थर को पूरी तरह प्रमुख खनिज** के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया। पहले इसका उपयोग के आधार पर दोहरा वर्गीकरण था।
चूना पत्थर को प्रमुख खनिज किस कानून के तहत घोषित किया गया?
चूना पत्थर को **खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act), 1957** के तहत प्रमुख खनिज के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया। **10 अक्टूबर 2025** की राजपत्र अधिसूचना से यह बदलाव लागू हुआ।
पहले चूना पत्थर का दोहरा वर्गीकरण क्या था?
पहले चूना पत्थर का **दोहरा वर्गीकरण** था: जब यह भवन निर्माण सामग्री के लिए चूना बनाने में उपयोग होता था तो **लघु खनिज**, और जब सीमेंट, रसायन व इस्पात के लिए उपयोग होता था तो **प्रमुख खनिज**। यह दोहरा वर्गीकरण अब समाप्त हो गया है।
भारत में प्रमुख और लघु खनिज में क्या अंतर है?
**प्रमुख खनिज** केंद्र सरकार द्वारा MMDR अधिनियम के तहत विनियमित होते हैं और इनके खनन के लिए केंद्रीय पट्टा आवश्यक है। **लघु खनिज** राज्य सरकारों द्वारा विनियमित होते हैं। चूना पत्थर को पूरी तरह प्रमुख खनिज घोषित करने से केंद्र का नियामक नियंत्रण बढ़ा है।
पुनर्वर्गीकरण के बाद चूना पत्थर के मौजूदा लघु खनिज पट्टों का क्या हुआ?
**13 अक्टूबर 2025 को MMDR अधिनियम की धारा 20A के तहत** जारी आदेश में चूना पत्थर के मौजूदा लघु खनिज पट्टों के लिए संक्रमणकालीन प्रावधान किए गए, जिससे भवन निर्माण सामग्री के लिए पट्टाधारकों को राहत मिली।