नीति आयोग ने 21 जनवरी 2026 को MSMEs के हरित परिवर्तन के लिए रोडमैप शीर्षक से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की। इसके साथ ही सीमेंट और एल्यूमीनियम क्षेत्रों के लिए अलग-अलग डीकार्बनाइजेशन रणनीति दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। यह रोडमैप भारत के 6.9 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को ऊर्जा दक्षता सुधार, नवीकरणीय बिजली अपनाने, प्रक्रिया सुधार और हरित वित्तपोषण साधनों तक पहुंच से टिकाऊ, कम-कार्बन विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए तैयार की गई 10-वर्षीय रणनीतिक कार्य योजना है।
भारत का MSME क्षेत्र GDP में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देता है, विनिर्माण में इसकी 36.2 प्रतिशत हिस्सेदारी है, निर्यात में 45.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है और यह 25 करोड़ रोजगार प्रदान करता है। इसलिए इस क्षेत्र का हरित परिवर्तन भारत की समग्र जलवायु प्रतिबद्धताओं के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट हरित परिवर्तन की प्रमुख बाधाओं की पहचान करती है, जिनमें स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए अधिक शुरुआती पूंजी लागत, छोटे उद्यमों में ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों के बारे में सीमित जागरूकता, हरित वित्त तक सीमित पहुंच और विशेष रूप से सूक्ष्म और लघु उद्यमों में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी अंतराल शामिल हैं।
रोडमैप चरणबद्ध तरीके की सिफारिश करता है। इसमें मध्यम उद्यमों के लिए अनिवार्य ऊर्जा लेखापरीक्षा से शुरुआत, प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण योजनाओं के जरिए कार्यक्षमता में सुधार, छत पर सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा खरीद को अपनाना तथा 2025-2030, 2030-2032 और 2032-2035 के चरणों में कार्यान्वयन बढ़ाना शामिल है। रिपोर्ट औद्योगिक समूहों में क्षेत्रीय हरित केंद्र, ऊर्जा-कुशल प्रौद्योगिकियों के लिए ₹6,000 करोड़ VGF समर्थन, PM-Suryaghar जैसी रूफटॉप सौर पहलों के लिए ₹7,000 करोड़ और MSME क्रेडिट रेटिंग में स्थिरता मापदंडों को शामिल करने का भी प्रस्ताव करती है।
