8 दिसंबर 2025 को भारत ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 17–19 दिसंबर 2025 को होने वाले दूसरे WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के लिए आधिकारिक उलटी गिनती शुरू की। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत के आयुष मंत्रालय ने मिलकर इस शिखर सम्मेलन का आयोजन किया। इसका विषय 'संतुलन की बहाली: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और व्यवहार' था। इसमें 100 से अधिक देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक और स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। WHO ने पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय का अनावरण किया। यह वैज्ञानिक अध्ययनों से लेकर स्वदेशी ज्ञान तक, पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े 16 लाख संसाधनों को एक जगह समेटने वाला डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। स्वास्थ्य एवं विरासत नवाचार (H2I) पहल भी शुरू की गई, जिसका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीनोमिक्स और डिजिटल स्वास्थ्य जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। 19 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समापन समारोह में शामिल हुए, जहाँ पारंपरिक चिकित्सा पर दिल्ली घोषणा अपनाई गई। प्रधानमंत्री मोदी ने माय आयुष एकीकृत सेवा पोर्टल (MAISP) शुरू किया और आयुष उत्पादों तथा सेवाओं की गुणवत्ता के वैश्विक मानक आयुष मार्क का अनावरण किया। पहला WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान 2023 में गांधीनगर, गुजरात में आयोजित हुआ था। यह शिखर सम्मेलन आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा की मुख्यधारा में स्थान दिलाने की भारत की कोशिशों का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसमें पारंपरिक चिकित्सा को हाशिये का विकल्प नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा का प्रमाण-आधारित पूरक माना गया है।