नवंबर 2025 के आसपास राजस्थान सरकार ने आर्थिक विकास को गति देने, निवेश बढ़ाने और बुनियादी ढाँचा मजबूत करने के लिए 12 नई औद्योगिक और क्षेत्रीय नीतियाँ लाने की योजना घोषित की। राज्य में क्षेत्रवार और निवेश से जुड़ी 22 नीतियाँ पहले से लागू हैं। नई नीतियों में सेमीकंडक्टर, रक्षा और एयरोस्पेस, ग्रीन हाइड्रोजन, सतत उद्योग और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्र शामिल होंगे। राजस्थान राइजिंग—इन्वेस्ट राजस्थान समिट और उसके बाद की पहलों के ज़रिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य को निवेश के पसंदीदा गंतव्य के रूप में पेश किया है। राजस्थान में सौर और पवन ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 30 GW से अधिक है और वह अक्षय ऊर्जा के मामले में भारत का अग्रणी राज्य है। इसलिए ग्रीन हाइड्रोजन उसकी ऊर्जा बदलाव की रणनीति का स्वाभाविक विस्तार है। राज्य की सीमा पाकिस्तान से लगती है, इसलिए रक्षा विनिर्माण गलियारे स्थापित करने में इसकी रणनीतिक अहमियत है। राजस्थान के 26 लाख से अधिक पंजीकृत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) उसकी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये नीतियाँ भारत की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के अनुरूप हैं। निवेशकों को सुविधाएँ देने के लिए राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) का ढाँचा आधार बनेगा। इन नीतियों से राज्य के अलग-अलग जिलों में लाखों रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।