भारतीय वायुसेना ने 20-31 अक्टूबर 2025 तक स्पेन के कैनरी द्वीपों में गैंडो एयर बेस पर आयोजित अभ्यास ओशन स्काई 2025 में भाग लेकर एक अहम उपलब्धि दर्ज की। यह स्पेनिश वायुसेना की मेजबानी वाला बहुराष्ट्रीय वायु युद्ध अभ्यास है। भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में शामिल होने वाली पहली गैर-नाटो वायुसेना बनी। इसलिए यह खबर केवल रक्षा अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की बदलती रणनीतिक पहुंच और स्पेन तथा नाटो से जुड़े अन्य देशों के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग को भी दिखाती है।
भारत ने इस अभ्यास के लिए चार सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान और 96 सदस्यीय दल भेजा। ओशन स्काई 2025 में भारतीय भागीदारी का मुख्य महत्व यह है कि भारतीय पायलटों और तकनीकी दल को बहुराष्ट्रीय माहौल में काम करने, संयुक्त अभियानों की प्रक्रिया समझने और अलग-अलग वायुसेनाओं के साथ समन्वय का अनुभव मिला। एयरबस के विवरण के अनुसार, 2025 संस्करण में 40 तक विमान शामिल हुए और अभ्यास का उद्देश्य इंटरऑपरेबिलिटी तथा हवाई-नियंत्रण संबंधी रणनीति को बेहतर करना था। कैनरी द्वीपों का क्षेत्र बड़े हवाई अभ्यासों के लिए उपयोगी माना गया, क्योंकि वहां मिशन अभ्यास के लिए अनुकूल मौसम और दक्षिण में अपेक्षाकृत खाली हवाई क्षेत्र उपलब्ध है।
परीक्षा की दृष्टि से ओशन स्काई 2025 में स्थान, मेजबान देश, भारत की पहली गैर-नाटो भागीदारी और सुखोई-30 एमकेआई जैसे रक्षा प्लेटफ़ॉर्म को साथ याद रखना उपयोगी है। प्रीलिम्स में स्थान, मेजबान देश, तिथि, विमान और पहली गैर-नाटो भागीदारी जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसका उपयोग भारत की रक्षा कूटनीति, संयुक्त अभ्यासों से क्षमता-वृद्धि और बदलते वैश्विक सुरक्षा सहयोग के उदाहरण के रूप में किया जा सकता है। स्टैटिक जीके में स्पेन, कैनरी द्वीप, गैंडो एयर बेस और भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों की बुनियादी जानकारी को इस उदाहरण से जोड़कर पढ़ना उपयोगी रहेगा।
