कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने गति फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कुशल भारतीय कामगारों के लिए विदेशों में रोजगार और वैश्विक कौशल गतिशीलता की व्यवस्था को अधिक संगठित बनाना है। गति यानी भारत की प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की पहल, और गति फाउंडेशन का संबंध इसी विचार से है। इस पहल को 2047 तक भारत को वैश्विक कौशल राजधानी बनाने की व्यापक दिशा से जोड़ा गया है।
यह समझौता केवल विदेश में रोजगार दिलाने तक सीमित नहीं है; इसका जोर संस्थागत तंत्र, कौशल प्रशिक्षण, भाषा-तैयारी, सांस्कृतिक तैयारी, दस्तावेज़ी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय श्रम बाज़ार की मांग को समझने पर है। मंत्रालय और गति फाउंडेशन मिलकर विदेशों में अधिक मांग वाली भूमिकाओं, प्राथमिक गंतव्य देशों और अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों की पहचान पर काम करेंगे। इससे कौशल विकास नीति को रोजगार-परक और बाज़ार-परक बनाने में मदद मिल सकती है।
व्यवस्था के तहत गति फाउंडेशन कौशल भवन, नई दिल्ली में एक परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित करेगा। यह इकाई मंत्रालय को शोध, निगरानी ढांचे, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और वैश्विक कौशल गतिशीलता से जुड़ी पहलों के डिज़ाइन में तकनीकी व रणनीतिक सहयोग देगी। सहयोग में स्किल इंडिया अंतरराष्ट्रीय केंद्रों के विकास, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक जैसे प्रशिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी, और वैश्विक नियोक्ताओं से जुड़ाव को भी शामिल किया गया है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से यह समझौता कौशल-आधारित विकास, मानव पूंजी निर्माण, सुरक्षित प्रवासन और विकसित भारत 2047 की रोजगार-परक रणनीति का उदाहरण देता है। प्रारंभिक परीक्षा में मंत्रालय, गति फाउंडेशन, समझौते का उद्देश्य, 2047 लक्ष्य और संस्थागत तंत्र से प्रश्न बन सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे कौशल आधारित विकास, जनसांख्यिकीय लाभांश और सुरक्षित, संगठित विदेशी रोजगार के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है।
