जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की 12 जनवरी 2026 की भारत यात्रा में रक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक ऐतिहासिक कदम सामने आया — रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करने के लिए संयुक्त आशय घोषणा (JDoI) पर हस्ताक्षर। इसमें रक्षा प्लेटफॉर्मों के लिए सह-विकास, सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की बात शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण पनडुब्बी सह-उत्पादन पर सिद्धांतगत समझौता था: भारत और जर्मनी मिलकर पनडुब्बियाँ बनाएँगे। यह भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 के तहत रक्षा विनिर्माण के स्वदेशीकरण लक्ष्य के अनुरूप है। जर्मनी की रक्षा कंपनी ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) — जो Type 212 और Type 214 पनडुब्बियाँ बनाती है — को भारत के Project 75I (छह उन्नत पनडुब्बियाँ) के संभावित भागीदार के रूप में देखा जाता रहा है। JDoI में अन्य रक्षा उपकरणों का सह-विकास, प्रौद्योगिकी भागीदारी और आपूर्ति-श्रृंखला एकीकरण भी शामिल है। 2022 यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर निर्भरता कम करने की कोशिश में लगे जर्मनी के लिए भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है। भारत के लिए यह अमेरिका, फ्रांस, इजरायल और रूस के अतिरिक्त यूरोप में एक नया रणनीतिक रक्षा साझेदारी विकल्प खोलता है।