प्रकाशित: 25 दिसंबर 2025राजस्थान
जयपुर तीन तेंदुआ सफारी वाला पहला शहर बना
राजस्थान में बढ़ते वन्यजीव पर्यटन के तहत जयपुर तीन तेंदुआ सफारी उपलब्ध कराने वाला भारत का पहला शहर बन गया। इन तीन तेंदुआ सफारी के अलावा शहर में एक तेंदुआ अभयारण्य, हाथी और शेर सफारी तथा बाघ सफारी भी है।
यह पहल राजस्थान पर्यटन नीति 2025 का हिस्सा है। नीति में 'एक पर्यटन स्थल अपनाएं' कार्यक्रम शामिल है, जो निजी भागीदारों, स्थानीय समुदायों और पर्यटन हितधारकों को ऐसी टिकाऊ व्यवस्था के तहत विरासत और पर्यावरण-पर्यटन स्थलों के पुनर्स्थापन, प्रबंधन और संचालन के लिए आमंत्रित करता है, जिसका खर्च उससे होने वाली आय से चले। राजस्थान ने 2024-25 में 2.5 करोड़ से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जयपुर की तीन तेंदुआ सफारी पहल हाल में खबरों में क्यों रही?
राजस्थान में बढ़ते वन्यजीव पर्यटन के तहत जयपुर तीन तेंदुआ सफारी उपलब्ध कराने वाला भारत का पहला शहर बना। इन तीन तेंदुआ सफारी के अलावा शहर में एक तेंदुआ अभयारण्य, हाथी और शेर सफारी तथा बाघ सफारी भी है। यह पहल राजस्थान पर्यटन नीति 2025 का हिस्सा है।
जयपुर की तेंदुआ सफारी का पर्यावरण और पर्यटन की दृष्टि से क्या महत्व है?
यह पहल राजस्थान में बढ़ते वन्यजीव पर्यटन को दर्शाती है। जयपुर में तीन तेंदुआ सफारी के अलावा एक तेंदुआ अभयारण्य, हाथी और शेर सफारी तथा बाघ सफारी भी है।
तेंदुआ सफारी पहल किस नीति के तहत शुरू की गई?
यह पहल राजस्थान पर्यटन नीति 2025 का हिस्सा है। नीति के 'एक पर्यटन स्थल अपनाएं' कार्यक्रम में निजी भागीदारों और स्थानीय समुदायों को विरासत और पर्यावरण-पर्यटन स्थलों के प्रबंधन के लिए आमंत्रित किया जाता है।
तीन तेंदुआ सफारी की यह पहल कहाँ है और इसकी पृष्ठभूमि क्या है?
राजस्थान का जयपुर शहर भारत में तीन तेंदुआ सफारी उपलब्ध कराने वाला पहला शहर बना। यह पहल राज्य में बढ़ते वन्यजीव पर्यटन का हिस्सा है।
यह पहल राजस्थान के पर्यटन आँकड़ों से कैसे जुड़ती है?
राजस्थान ने 2024-25 में 2.5 करोड़ से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया। यह आँकड़ा जयपुर की तेंदुआ सफारी जैसी वन्यजीव पर्यटन पहलों की भूमिका को रेखांकित करता है।