नीति आयोग ने राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (एफएचआई) 2026 का दूसरा वार्षिक संस्करण जारी किया, जिसमें वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राज्यों की वित्तीय स्थिति को शामिल किया गया है। रिपोर्ट नई दिल्ली में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने जारी की। पहली बार, सूचकांक में 18 सामान्य श्रेणी राज्यों के साथ-साथ 10 पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के अलग समूह का भी मूल्यांकन किया गया है, जिससे भारत की राजकोषीय विविधता का आकलन अधिक समावेशी बनता है। सूचकांक पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाव, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक एवं ऋण स्थिरता। पारदर्शिता और पद्धति की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए इसमें भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के ऑडिटेड डेटा का उपयोग किया गया है। एफएचआई 2026 में प्रमुख राज्यों में लगातार दूसरे वर्ष ओडिशा शीर्ष स्थान पर रहा, जिसने 73.1 अंक प्राप्त किए। प्रमुख राज्य श्रेणी में शीर्ष छह राज्य ओडिशा, गोवा, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ हैं। पंजाब एवं पश्चिम बंगाल प्रमुख राज्यों में सबसे नीचे हैं, जिनका ऋण-से-जीएसडीपी अनुपात 40-45 प्रतिशत की सीमा में है, जो एफआरबीएम मानदंड से काफी ऊपर है। ओडिशा की मजबूती का कारण 3 प्रतिशत एफआरबीएम बेंचमार्क के भीतर राजकोषीय घाटा, ऋण-से-जीएसडीपी में 2019-20 के 23 प्रतिशत से अधिक से 2023-24 में लगभग 14-15 प्रतिशत तक कमी, 60 प्रतिशत से अधिक अपने-कर राजस्व की उच्च हिस्सेदारी, खनन-आधारित मजबूत गैर-कर राजस्व तथा स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अवसंरचना पर केंद्रित जीएसडीपी के लगभग 4-5 प्रतिशत के पूंजीगत व्यय को माना गया है। रिपोर्ट दीर्घकालिक राजकोषीय स्थिरता के लिए राज्य कर क्षमता को मजबूत करने, प्रतिबद्ध व्यय को तर्कसंगत बनाने तथा पूंजी व्यय की गुणवत्ता में सुधार की अनुशंसा करती है।