भारत ने दवा प्रतिरोध से निपटने के लिए पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन विकसित की
Aसीधा उत्तर
वॉकहार्ट और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के सहयोग से विकसित भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन, समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया (CABP) के 3 दिन के उपचार में मौजूदा विकल्पों से 10 गुना अधिक प्रभावी है।
मुख्य तथ्य
नैफिथ्रोमाइसिन (ब्रांड: MIQNAF) भारत में खोजी गई पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक है। यह मैक्रोलाइड वर्ग का अणु है और इस वर्ग में 30 से अधिक वर्षों बाद दुनिया में पेश किया गया पहला नया एंटीबायोटिक है
इसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के सहयोग से विकसित किया गया और वॉकहार्ट ने बाज़ार में उतारा
इसका उपयोग समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया (CABP) के उपचार में होता है; यह मौजूदा विकल्पों से 10 गुना अधिक प्रभावी है
पारंपरिक 7-10 दिनों के मुकाबले इसका उपचार 3 दिन का है
इसके विकास में 14 वर्ष का शोध और ₹500 करोड़ का निवेश लगा; नैदानिक परीक्षण अमेरिका, यूरोप और भारत में हुए
भारत में खोजी गई पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन (ब्रांड नाम MIQNAF) को 20 नवंबर 2024 को औपचारिक रूप से सीमित स्तर पर बाज़ार में उतारा गया। इसे दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना गया। यह मैक्रोलाइड वर्ग की एंटीबायोटिक है और इस वर्ग में 30 से अधिक वर्षों बाद दुनिया में पेश किया गया पहला नया अणु है।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के सहयोग से विकसित नैफिथ्रोमाइसिन को वॉकहार्ट ने बाज़ार में उतारा। इसका उपयोग समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया (CABP) के उपचार में किया जाता है। यह मौजूदा विकल्पों से 10 गुना अधिक प्रभावी है और पारंपरिक 7-10 दिनों के मुकाबले इसका उपचार 3 दिन का है। इसे विकसित करने में 14 वर्ष का शोध और ₹500 करोड़ का निवेश लगा। इसके नैदानिक परीक्षण अमेरिका, यूरोप और भारत में हुए।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: रोगाणुरोधी प्रतिरोध से निपटने और दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भारत में खोजी गई पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन के महत्व का आकलन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
MIQNAF ब्रांड की नैफिथ्रोमाइसिन समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया के उपचार में मौजूदा विकल्पों से 10 गुना अधिक प्रभावी है; इसका उपचार 7-10 के बजाय 3 दिन का है। वॉकहार्ट ने इसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के सहयोग, 14 वर्ष के शोध और ₹500 करोड़ के निवेश से विकसित किया। यह 30 वर्षों में पहला नया मैक्रोलाइड है।
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नवंबर 2025 में शुरू की गई भारत की पहली स्वदेशी क्रिस्पर जीन थेरेपी बिरसा 101 किस रोग के लिए है?
व्याख्या · सही उत्तर B
BIRSA 101 सिकल सेल रोग को लक्षित करता है। CSIR-IGIB द्वारा सीरम इंस्टीट्यूट के साथ विकसित, इसकी लागत वैश्विक थेरेपी की 20-25 करोड़ के मुकाबले 50 लाख रुपये अनुमानित है।
**नैफिथ्रोमाइसिन** (ब्रांड: MIQNAF) **भारत में खोजी गई पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक** है। यह **मैक्रोलाइड वर्ग का अणु** है और इस वर्ग में **30 से अधिक वर्षों** बाद दुनिया में पेश किया गया पहला नया मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक है। इसका उपयोग **समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया (CABP)** के उपचार में होता है और यह मौजूदा विकल्पों से **10 गुना अधिक प्रभावी** है।
नैफिथ्रोमाइसिन किसने विकसित किया और इसमें कितना समय लगा?
नैफिथ्रोमाइसिन को **जैव प्रौद्योगिकी विभाग** के अंतर्गत **जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC)** के सहयोग से विकसित किया गया और **वॉकहार्ट** ने बाज़ार में उतारा। इसके विकास में **14 वर्ष का शोध** और **₹500 करोड़ का निवेश** लगा। इसके नैदानिक परीक्षण अमेरिका, यूरोप और भारत में हुए।
नैफिथ्रोमाइसिन किस रोग का इलाज करता है और उपचार कितने दिन चलता है?
नैफिथ्रोमाइसिन (MIQNAF) का उपयोग **समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया (CABP)** के उपचार में होता है। इसका उपचार केवल **3 दिन** का है, जबकि पारंपरिक उपचार **7-10 दिन** चलता है। कम अवधि के कारण मरीजों के लिए उपचार का पूरा क्रम लेना आसान होता है।
नैफिथ्रोमाइसिन मौजूदा एंटीबायोटिक दवाओं की तुलना में कितना प्रभावी है?
**नैफिथ्रोमाइसिन** समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया (CABP) के उपचार में मौजूदा विकल्पों से **10 गुना अधिक प्रभावी** है। इसका उपचार केवल **3 दिन** का है, जबकि मानक उपचार **7-10 दिन** चलता है।
जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) क्या है और नैफिथ्रोमाइसिन के विकास में इसकी क्या भूमिका थी?
**जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC)** भारत के **जैव प्रौद्योगिकी विभाग** के अंतर्गत है। इसने भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन के विकास में सहयोग दिया, जिसे वॉकहार्ट ने 14 वर्ष के शोध के बाद बाज़ार में उतारा।
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