भारत में खोजी गई पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक नैफिथ्रोमाइसिन (ब्रांड नाम MIQNAF) को 20 नवंबर 2024 को औपचारिक रूप से सीमित स्तर पर बाज़ार में उतारा गया। इसे दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना गया। यह मैक्रोलाइड वर्ग की एंटीबायोटिक है और इस वर्ग में 30 से अधिक वर्षों बाद दुनिया में पेश किया गया पहला नया अणु है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) के सहयोग से विकसित नैफिथ्रोमाइसिन को वॉकहार्ट ने बाज़ार में उतारा। इसका उपयोग समुदाय में होने वाले बैक्टीरियल निमोनिया (CABP) के उपचार में किया जाता है। यह मौजूदा विकल्पों से 10 गुना अधिक प्रभावी है और पारंपरिक 7-10 दिनों के मुकाबले इसका उपचार 3 दिन का है। इसे विकसित करने में 14 वर्ष का शोध और ₹500 करोड़ का निवेश लगा। इसके नैदानिक परीक्षण अमेरिका, यूरोप और भारत में हुए।