प्रकाशित: 30 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
सरकार ने कोकिंग कोल को भारत के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया
भारत सरकार ने कोयला मंत्रालय की 29 जनवरी 2026 की अधिसूचना के तहत कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया। भारत को कोकिंग कोल की जितनी आवश्यकता है, उसका लगभग 85% आयात होता है, मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया से। इससे आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है। कोकिंग कोल इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है।
इस दर्जे के बाद कोकिंग कोल के खनन के लिए कोयला ब्लॉकों का प्राथमिकता से आवंटन, खदानों को पर्यावरण मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज़ करना और भंडारण के प्रावधान करना संभव होगा। भारत का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर, कोयले की धुलाई करके और हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष अपचयन जैसी वैकल्पिक इस्पात-निर्माण तकनीकें विकसित करके 2030-31 तक कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता 65% तक घटाना है।
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भारत का कोकिंग कोल भंडार कितने अरब टन अनुमानित है?
व्याख्या · सही उत्तर Bभारत के पास 37.37 अरब टन कोकिंग कोल भंडार है लेकिन इस्पात क्षेत्र की 95% आवश्यकताओं का आयात करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोकिंग कोल को खान और खनिज विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1957 (MMDR अधिनियम) के तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज क्यों घोषित किया गया?
भारत में लगभग **37.37 अरब टन** कोकिंग कोल का भंडार है। इसके बावजूद इस्पात क्षेत्र के लिए आवश्यक कोकिंग कोल का लगभग **95%** आयात किया जाता है। इससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है और आपूर्ति शृंखला बाधित होने का जोखिम बढ़ता है।
भारत में कोकिंग कोल का घरेलू भंडार कितना है और आयात इतना अधिक क्यों करना पड़ता है?
भारत में लगभग **37.37 अरब टन** कोकिंग कोल का भंडार है। लेकिन भारतीय कोकिंग कोल में राख की मात्रा अधिक होने के कारण इसकी गुणवत्ता कम होती है और बेहतर गुणवत्ता वाले कोयले में मिलाए बिना इसका सीधे इस्पात उत्पादन में उपयोग नहीं किया जा सकता। इसी कारण लगभग **95% आवश्यकता** मुख्यतः **ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका** से आयात करके पूरी की जाती है।
MMDR अधिनियम के तहत कोकिंग कोल को मिला यह दर्जा क्यों महत्वपूर्ण है?
**MMDR अधिनियम, 1957** के तहत कोकिंग कोल को **महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज** घोषित करने से केंद्र सरकार इसकी खोज को प्राथमिकता दे सकती है, खनन ब्लॉकों की नीलामी तेज़ कर सकती है और उनके आवंटन पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रख सकती है। इससे निजी क्षेत्र पर लगी पाबंदियां घट सकती हैं और घरेलू उत्पादन बढ़ सकता है।
कोकिंग कोल का भारत के इस्पात उद्योग से क्या संबंध है?
**कोकिंग कोल** ब्लास्ट फर्नेस पद्धति से इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल है। इसे **कोक** में बदला जाता है, जो इस्पात बनाने की प्रक्रिया में ईंधन और अपचायक पदार्थ, दोनों का काम करता है। प्रमुख इस्पात उत्पादक देश होने के कारण भारत को बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की आवश्यकता होती है और फिलहाल इसकी लगभग पूरी आवश्यकता आयात से पूरी होती है।
MMDR अधिनियम के तहत कोकिंग कोल के साथ और कौन-से खनिज महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की सूची में हैं?
**MMDR अधिनियम** के तहत भारत की महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज सूची में **लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, टाइटेनियम, दुर्लभ मृदा तत्व** और अब **कोकिंग कोल** शामिल हैं। ये खनिज राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक हैं, और भारत के सामने इनकी आपूर्ति बाधित होने का जोखिम है।