भारत सरकार ने कोयला मंत्रालय की 29 जनवरी 2026 की अधिसूचना के तहत कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज घोषित किया। भारत को कोकिंग कोल की जितनी आवश्यकता है, उसका लगभग 85% आयात होता है, मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया से। इससे आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है। कोकिंग कोल इस्पात उत्पादन के लिए आवश्यक है और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है।

इस दर्जे के बाद कोकिंग कोल के खनन के लिए कोयला ब्लॉकों का प्राथमिकता से आवंटन, खदानों को पर्यावरण मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज़ करना और भंडारण के प्रावधान करना संभव होगा। भारत का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर, कोयले की धुलाई करके और हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष अपचयन जैसी वैकल्पिक इस्पात-निर्माण तकनीकें विकसित करके 2030-31 तक कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता 65% तक घटाना है।