7 नवंबर 2025 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार विधानसभा चुनावों से पूर्व चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता पर 11 नवंबर को विस्तृत बहस के लिए तुरंत सुनवाई तय की। 24 जून 2025 को अधिसूचित SIR में सभी मतदाताओं के लिए मतदाता सूची में शामिल होने के लिए नए फॉर्म भरना जरूरी था; जो मतदाता 2003 की मतदाता सूचियों में नहीं थे, उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ते। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (रिट याचिका सिविल 640/2025) सहित याचिकाकर्ताओं ने इसे मनमाना और लाखों मतदाताओं को वंचित करने वाला बताया। न्यायालय ने पहले ECI को SIR जारी रखने की अनुमति दी थी लेकिन आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार की विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची चुनौती को 11 नवंबर को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया
7 नवंबर 2025 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता पर 11 नवंबर को विस्तृत बहस के लिए मामले को तुरंत सूचीबद्ध किया। 24 जून 2025 को अधिसूचित SIR में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए सभी मतदाताओं को नए फॉर्म भरने थे; जो मतदाता 2003 की मतदाता सूचियों में नहीं थे, उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ते। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (रिट याचिका सिविल 640/2025) सहित याचिकाकर्ताओं ने इसे मनमाना और लाखों मतदाताओं को वंचित करने वाला बताया। न्यायालय ने पहले ECI को SIR जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया।
मुख्य तथ्य
- सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार SIR मतदाता सूची चुनौती को 11 नवंबर को विस्तृत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
- 24 जून 2025 को अधिसूचित SIR के तहत सभी मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल होने के लिए नए फॉर्म भरने होंगे।
- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने SIR को मनमाना और लाखों को वंचित करने वाला बताकर चुनौती दी।
- न्यायालय ने ECI को SIR जारी रखने दिया लेकिन आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड स्वीकार करने का निर्देश दिया।
- आलोचकों ने कहा कि बिहार में SIR का असर प्रवासियों और हाशिये के समुदायों पर असमान रूप से पड़ता है।
- यह 2003 के बाद बिहार में पहला गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण था।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2023 राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य कार्य क्या है? — राज्य निर्वाचन आयोग के कार्य — निर्वाचक नामावली प्रबंधन से सीधे जुड़े हुए।
- RAS 2021 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 103 में निर्वाचन आयोग की क्या भूमिका है? — अनुच्छेद 103 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की भूमिका — ECI की SIR शक्तियों से प्रासंगिक।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: चुनाव आयोग द्वारा बिहार मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण से उठे संवैधानिक मुद्दों और सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की समीक्षा करें।
उत्तर (50 शब्द): 24 जून 2025 को अधिसूचित एसआईआर में चुनाव आयोग ने बिहार के सभी मतदाताओं से नए फॉर्म मांगे; 2003 की सूची से अनुपस्थित लोगों को अतिरिक्त दस्तावेज देने थे। सर्वोच्च न्यायालय ने 7 नवंबर 2025 को 11 नवंबर के लिए मामला सूचीबद्ध करते हुए आधार, मतदाता पहचान एवं राशन कार्ड स्वीकार्य घोषित किए। याचियों ने प्रवासियों और हाशिए के समुदायों से मनमाने ढंग से मताधिकार छीनने का आरोप लगाया।
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11 नवंबर 2025 को सूचीबद्ध सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई में बिहार की मतदाता सूची से संबंधित भारत निर्वाचन आयोग की कौन-सी प्रक्रिया चुनौती के दायरे में थी?
सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार की मतदाता सूची से जुड़ी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की वैधता पर विस्तृत सुनवाई 11 नवंबर 2025 के लिए तय की। भारत निर्वाचन आयोग ने यह प्रक्रिया 24 जून 2025 को अधिसूचित की थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) क्या है और इसे सर्वोच्च न्यायालय में क्यों चुनौती दी गई?
विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व 24 जून 2025 को चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचित किया गया, जिसमें सभी मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल होने के लिए नए फॉर्म भरने थे। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने इसे मनमाना बताते हुए चुनौती दी कि यह लाखों मतदाताओं, विशेषकर प्रवासियों और हाशिये के समुदायों को वंचित कर सकता है।
बिहार SIR के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने ECI को कौन से दस्तावेज स्वीकार करने का निर्देश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने ECI को SIR जारी रखने की अनुमति देते हुए मतदाता सूची में शामिल होने के वैध प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड स्वीकार करने का निर्देश दिया।
2025 से पहले बिहार में अंतिम बार विशेष सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण कब हुआ था?
2025 का SIR 2003 के बाद बिहार में पहला गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण था, जो दो दशकों से अधिक समय बाद की गई एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया थी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण में भारत निर्वाचन आयोग की क्या भूमिका है?
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) अनुच्छेद 324 के तहत एक संवैधानिक निकाय है जो चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है, जिसमें चुनाव से पहले सटीक मतदाता पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूचियों का आवधिक पुनरीक्षण भी शामिल है।
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