राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026, जिसे 9 मार्च को राज्य विधानसभा ने पारित किया, पंचायत चुनाव लड़ने के लिए लागू 31 साल पुरानी दो-बच्चों की शर्त को समाप्त करता है। यह संशोधन राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 19 में बदलाव करता है और वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख सहित पदों के लिए बच्चों की संख्या से जुड़े पात्रता प्रतिबंध को हटाता है। दो-बच्चों की शर्त पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कार्यकाल में जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण के लिए शुरू की गई थी। सरकार ने महिलाओं में बढ़ती शिक्षा और जागरूकता के कारण घटती जनसंख्या वृद्धि दर का हवाला दिया।
राजस्थान विधानसभा ने पहले पंचायती राज चुनावों के लिए दो-बच्चों की शर्त समाप्त की थी
राजस्थान ने पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026 से पंचायत चुनावों के लिए 31 साल पुरानी दो-बच्चों की शर्त समाप्त की।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 राज्य विधानसभा द्वारा 9 मार्च को पारित किया गया, जिससे 31 साल पुराना दो-बच्चा नीति वाला प्रतिबंध हटा दिया गया।
- अब दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी पंचायत चुनाव लड़ सकेंगे।
- यह प्रतिबंध 1994 में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत लागू हुआ था।
- यह संशोधन लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने और परिवार नियोजन नीति को चुनावी पात्रता से अलग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- राजस्थान के बाद अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के सुधारों की चर्चा शुरू हो गई है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2024 "राजस्थान पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में उनके आवेदन में उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 1999" के प्रभावी क्रियान्वयन में क्या चुनौतियाँ हैं? — अनुसूचित क्षेत्रों में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की क्रियान्वयन चुनौतियाँ — सीधे प्रासंगिक।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026 से राजस्थान द्वारा पंचायत चुनावों के लिए दो-बच्चों की शर्त हटाने का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
उत्तर (50 शब्द): राजस्थान विधानसभा ने 9 मार्च 2026 को 1994 अधिनियम की धारा 19 में संशोधन कर सरपंच, वार्ड पंच, पंचायत समिति, जिला परिषद एवं प्रधान पदों के लिए 31 वर्षों से लागू दो-बच्चों की पात्रता शर्त समाप्त की। सरकार ने घटती प्रजनन दर एवं महिला सशक्तिकरण का तर्क दिया; इसी तरह नगरपालिका विधेयक शहरी निकायों के लिए भी यही प्रतिबंध हटाता है।
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राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक, 2026 पंचायत चुनावों में पात्रता से जुड़ी कौन-सी पाबंदी हटाता है?
राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026, जो 9 मार्च को पारित हुआ, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 में संशोधन करके पंचायत चुनावों के लिए 31 साल पुराने दो-बच्चे के नियम को समाप्त करता है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक, 2026 ने क्या हटाया?
राज्य विधानसभा द्वारा 9 मार्च को पारित राजस्थान पंचायती राज संशोधन विधेयक, 2026 ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए लागू 31 वर्ष पुराने दो-संतान मानदंड को हटा दिया।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम का कौन सा हिस्सा बदला गया और कौन से पद शामिल हैं?
संशोधन में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 बदली गई और बच्चों से जुड़ी पात्रता पाबंदियां हटाई गईं। इसमें वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख के पद शामिल हैं।
दो-संतान मानदंड क्यों लाया गया था और सरकार ने इसे हटाने का क्या कारण बताया?
दो-संतान मानदंड पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कार्यकाल में जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित करने के लिए लाया गया था। सरकार ने इसे हटाने की वजह महिलाओं में बढ़ती शिक्षा और जागरूकता के कारण जनसंख्या वृद्धि दरों में आई गिरावट को बताया।
शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनावी पाबंदी में इसी तरह का कौन सा बदलाव बताया गया?
समान नगरपालिका संशोधन विधेयक शहरी स्थानीय निकाय चुनावों पर लगी यह पाबंदी हटाता है।
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