26 नवंबर 2025 को संविधान दिवस के अवसर पर 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने नई श्रम संहिताओं के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। विरोध का मुख्य मुद्दा यह था कि श्रम कानूनों में बड़े बदलाव लागू करने से पहले व्यापक परामर्श होना चाहिए। यूनियनों ने निश्चित अवधि वाले रोजगार, कामकाजी घंटों में वृद्धि और हड़ताल के अधिकार पर कड़े प्रावधानों से जुड़ी चिंताएं उठाईं।

परीक्षा की दृष्टि से यह विषय केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि श्रम सुधार, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक प्रशासन से जुड़ा करेंट अफ़ेयर्स मुद्दा है। केंद्र सरकार के श्रम सुधारों में 29 श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है: मजदूरी संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020; और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता, 2020। इसलिए इस घटना को श्रमिक अधिकार बनाम अनुपालन सरलता, रोजगार लचीलापन बनाम नौकरी सुरक्षा, और नीति निर्माण में परामर्श की भूमिका जैसे बिंदुओं से जोड़कर पढ़ना चाहिए।

RAS और UPSC के लिए यह मुद्दा प्रीलिम्स में श्रम संहिताओं, संविधान दिवस और ट्रेड यूनियन से जुड़े तथ्य के रूप में पूछा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में इसका उपयोग शासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय के उत्तरों में किया जा सकता है, खासकर तब जब प्रश्न श्रम बाजार सुधारों, हितधारक परामर्श, औद्योगिक शांति या श्रमिक कल्याण पर हो। यह स्टैटिक जीके को समसामयिकी से जोड़ने का भी अच्छा उदाहरण है, क्योंकि संविधान दिवस और श्रम कानून दोनों परीक्षा में संदर्भ बन सकते हैं। उत्तर लिखते समय संतुलन जरूरी है: सरकार सुधारों को कानूनों के सरलीकरण और अनुपालन सुधार से जोड़ती है, जबकि यूनियनों ने श्रमिक अधिकारों के कमजोर होने की आशंका जताई।