भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 8 नवंबर 2025 को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों पर उपलब्ध 'डिजिटल गोल्ड' या 'ई-गोल्ड' में निवेश को लेकर निवेशकों को औपचारिक चेतावनी जारी की। SEBI ने स्पष्ट किया कि डिजिटल गोल्ड न तो प्रतिभूति कानूनों के तहत प्रतिभूति की श्रेणी में आता है और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव नियमों के अंतर्गत, यानी यह पूरी तरह SEBI की निगरानी से बाहर है। नियामक ने चेतावनी दी कि ऐसे उत्पादों में निवेशकों को प्रतिपक्ष और परिचालन जोखिम उठाने पड़ सकते हैं और प्रतिभूति बाजार ढाँचे के तहत कोई भी निवेशक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध नहीं है। SEBI ने निवेशकों को एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट, गोल्ड ETF और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद (EGR) जैसे विनियमित विकल्प चुनने की सलाह दी।
SEBI ने अनियंत्रित 'डिजिटल गोल्ड' निवेश को लेकर जनता को सावधान किया — निवेशक सुरक्षा उपलब्ध नहीं
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 8 नवंबर 2025 को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्मों पर उपलब्ध 'डिजिटल गोल्ड' या 'ई-गोल्ड' में निवेश को लेकर निवेशकों को औपचारिक चेतावनी जारी की। SEBI ने स्पष्ट किया कि डिजिटल गोल्ड न तो प्रतिभूति कानूनों के तहत सिक्योरिटी की श्रेणी में आता है और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव नियमों के अंतर्गत आता है; यानी यह पूरी तरह SEBI की निगरानी से बाहर है। नियामक ने चेताया कि ऐसे उत्पादों में निवेश करने पर निवेशकों को प्रतिपक्ष और परिचालन संबंधी जोखिम उठाने पड़ सकते हैं और प्रतिभूति बाजार ढाँचे के तहत कोई निवेशक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध नहीं होता। SEBI ने निवेशकों को एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट, गोल्ड ETF और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद (EGR) जैसे विनियमित विकल्प चुनने की सलाह दी।
मुख्य तथ्य
- SEBI ने 8 नवंबर 2025 को अनियंत्रित 'डिजिटल गोल्ड' उत्पादों में निवेश को लेकर औपचारिक चेतावनी जारी की।
- डिजिटल गोल्ड प्रतिभूति कानूनों के तहत न तो प्रतिभूति है और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव नियमों के अंतर्गत आता है।
- निवेशकों के सामने प्रतिपक्ष और परिचालन जोखिम हैं, और SEBI का कोई निवेशक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध नहीं है।
- SEBI ने विनियमित विकल्पों — गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद — की सलाह दी।
- डिजिटल निवेश में युवा निवेशकों की बढ़ती रुचि के बीच यह परामर्श जारी किया गया है।
- एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट, गोल्ड ETF और EGR में पारदर्शी मूल्य निर्धारण, निवेशक सुरक्षा और नियामकीय निगरानी उपलब्ध होती है।
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स्रोत: SEBI.gov.in / MediaNama / TaxTMI / Groww / Upstox
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
SEBI ने नवंबर 2025 में 'डिजिटल गोल्ड' को लेकर चेतावनी क्यों जारी की?
SEBI ने 8 नवंबर 2025 को औपचारिक चेतावनी जारी की, क्योंकि डिजिटल गोल्ड प्रतिभूति कानूनों के तहत प्रतिभूति नहीं है और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव नियमों के दायरे में आता है। इसलिए यह पूरी तरह SEBI की निगरानी से बाहर है और निवेशकों को कोई नियामकीय सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
बिना नियमन वाले डिजिटल गोल्ड उत्पादों में निवेश करने पर निवेशकों को क्या जोखिम होते हैं?
अविनियमित डिजिटल गोल्ड में निवेशकों को प्रतिपक्ष जोखिम (प्लेटफ़ॉर्म के विफल होने का जोखिम) और परिचालन जोखिम झेलना पड़ता है; साथ ही SEBI की शिकायत निवारण या क्षतिपूर्ति जैसी निवेशक सुरक्षा व्यवस्थाएँ उपलब्ध नहीं होतीं।
SEBI ने डिजिटल गोल्ड के विकल्प के तौर पर कौन से विनियमित साधन सुझाए?
SEBI ने तीन विनियमित विकल्प सुझाए — गोल्ड ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड), सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रसीद (EGR) — इनमें पारदर्शी मूल्य निर्धारण, निवेशक सुरक्षा और नियामकीय निगरानी मिलती है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और गोल्ड ETF में क्या अंतर है?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी सरकारी प्रतिभूतियाँ हैं। इन पर 2.5% वार्षिक ब्याज भी मिलता है और परिपक्वता पर पूँजीगत लाभ कर से छूट मिलती है, जबकि गोल्ड ETF शेयर बाजार में कारोबार होने वाली म्यूचुअल फंड इकाइयाँ हैं जो घरेलू सोने की कीमत को ट्रैक करती हैं।
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