प्रकाशित: 6 जनवरी 2026समाचार स्रोतअंतरराष्ट्रीय
तालिबान-नियुक्त राजनयिक नूर अहमद नूर अफगान दूतावास की कमान संभालने भारत पहुंचे
मुफ्ती नूर अहमद नूर, 2021 में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद भारत में नियुक्त पहले तालिबान राजनयिक, 7 जनवरी 2026 को अफगानिस्तान दूतावास में कार्यवाहक प्रभारी का पदभार ग्रहण करने नई दिल्ली पहुंचे। उन्होंने 9 जनवरी को आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाला। नूर पहले अफगानिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रथम राजनीतिक विभाग के महानिदेशक थे।
उनकी नियुक्ति अक्टूबर 2025 में तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा के बाद हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि यह काबुल में भारत के तकनीकी मिशन के उन्नयन से जुड़ा है। भारत तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं देता लेकिन सीमित संपर्क बनाए हुए है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत द्वारा तालिबान-नियुक्त राजनयिक को अफगानिस्तान के दिल्ली दूतावास का प्रमुख बनाने की अनुमति देने के भारतीय विदेश नीति पर निहितार्थों का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द): पहले तालिबान-नियुक्त राजनयिक मुफ्ती नूर अहमद नूर सात जनवरी 2026 को नई दिल्ली पहुंचे तथा नौ जनवरी को प्रभारी राजदूत का कार्यभार ग्रहण किया। मुत्ताकी की अक्टूबर 2025 यात्रा एवं काबुल तकनीकी मिशन उन्नयन के पश्चात यह कदम तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता दिए बिना मानवीय सहायता पर आधारित सीमित संपर्क को गहरा करता है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
जनवरी 2026 में भारत आए तालिबान-नियुक्त उस राजनयिक का क्या नाम है, जिसे अफगान दूतावास का नेतृत्व सौंपा गया?
व्याख्या · सही उत्तर Cनूर अहमद नूर अफगान दूतावास का नेतृत्व करने के लिए तालिबान द्वारा नियुक्त राजनयिक के रूप में भारत पहुंचे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुफ्ती नूर अहमद नूर कौन हैं और जनवरी 2026 में उनके भारत आने का क्या महत्व है?
**मुफ्ती नूर अहमद नूर** **2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी** के बाद भारत में तैनात **तालिबान द्वारा नियुक्त पहले राजनयिक** हैं। वे **7 जनवरी 2026** को अफगानिस्तान दूतावास में **कार्यवाहक प्रभारी** के रूप में **नई दिल्ली** पहुंचे और **9 जनवरी** को आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाला। इससे पहले वे अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रथम राजनीतिक विभाग के **महानिदेशक** थे।
जनवरी 2026 तक अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के प्रति भारत की राजनयिक नीति क्या है?
भारत **तालिबान सरकार** को आधिकारिक मान्यता **नहीं देता**, लेकिन **मानवीय सहायता** और **राजनयिक संपर्क** के ज़रिए **सीमित स्तर पर संपर्क** बनाए रखता है। **मुफ्ती नूर अहमद नूर** की **कार्यवाहक प्रभारी** के रूप में तैनाती (7 जनवरी 2026) काबुल में **भारत के तकनीकी मिशन के उन्नयन** के भारत के निर्णय से जुड़ी थी। यह **अक्टूबर 2025** में **तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी** की भारत यात्रा के बाद हुआ।
अक्टूबर 2025 में तालिबान विदेश मंत्री की भारत यात्रा और नूर अहमद नूर की तैनाती के बीच क्या संबंध है?
**अक्टूबर 2025** में **तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी** की **भारत की सप्ताह भर की यात्रा** के बाद भारत ने **काबुल में तकनीकी मिशन का उन्नयन** करने का निर्णय लिया और तालिबान को नई दिल्ली में राजनयिक तैनात करने की अनुमति दी। **मुफ्ती नूर अहमद नूर** **7 जनवरी 2026** को **कार्यवाहक प्रभारी** के रूप में आए — **2021 के बाद भारत में तालिबान द्वारा नियुक्त पहले राजनयिक**।
भारत में तैनात होने से पहले मुफ्ती नूर अहमद नूर ने अफगानिस्तान में क्या पद संभाला था?
भारत में तैनाती से पहले **मुफ्ती नूर अहमद नूर** तालिबान सरकार के तहत अफगानिस्तान के **विदेश मंत्रालय के प्रथम राजनीतिक विभाग के महानिदेशक** थे। वे **7 जनवरी 2026** को **नई दिल्ली** पहुंचे और **9 जनवरी** को अफगानिस्तान दूतावास में **कार्यवाहक प्रभारी** का पदभार संभाला — **2021** के बाद भारत में तालिबान द्वारा नियुक्त पहले राजनयिक।
नूर अहमद नूर की तैनाती काबुल में भारत के तकनीकी मिशन के उन्नयन से कैसे जुड़ी है?
**मुफ्ती नूर अहमद नूर** की नई दिल्ली में **कार्यवाहक प्रभारी** के रूप में तैनाती (7 जनवरी 2026) सीधे भारत के **काबुल में तकनीकी मिशन के उन्नयन** के निर्णय से जुड़ी है। इस आपसी राजनयिक व्यवस्था की पुष्टि **विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल** ने की। यह **तालिबान विदेश मंत्री मुत्ताकी की अक्टूबर 2025 भारत यात्रा** के बाद हुई। भारत तालिबान को मान्यता नहीं देता, लेकिन **मानवीय सहायता** से संपर्क बनाए रखता है।