केंद्र सरकार ने 19 मार्च को निर्यात संवर्धन मिशन के तहत ₹497 करोड़ आवंटन के साथ RELIEF (रिजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन) योजना मंजूर की। यह योजना पश्चिम एशिया तनाव के कारण बढ़ी माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और युद्ध-संबंधित निर्यात जोखिमों से निपटती है। इसके तीन घटक हैं: बीमित खेपों के लिए पूर्वव्यापी 100% जोखिम कवरेज (14 फरवरी - 15 मार्च 2026), अगले तीन महीनों के लिए भावी 95% कवरेज (16 मार्च - 15 जून 2026), और MSMEs को प्रति निर्यातक ₹50 लाख तक माल ढुलाई/बीमा लागत की 50% प्रतिपूर्ति। ECGC लिमिटेड नोडल कार्यान्वयन एजेंसी है।
सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के असर से निर्यातकों को बचाने के लिए ₹497 करोड़ की RELIEF योजना मंजूर की
सरकार ने पश्चिम एशिया में आए व्यवधानों से प्रभावित निर्यातकों के लिए तीन स्तरों वाली जोखिम-कवरेज के साथ ₹497 करोड़ की RELIEF योजना मंजूर की।
मुख्य तथ्य
- रिलीफ (रिजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन) योजना 19 मार्च को ₹497 करोड़ के आवंटन के साथ अनुमोदित की गई।
- यह योजना निर्यातकों की लॉजिस्टिक्स लागत में मदद करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बनाने के लिए है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से भारतीय निर्यात पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया।
- MSME और छोटे निर्यातक इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी होंगे।
- भारत का वार्षिक माल निर्यात लक्ष्य $50,000 करोड़ से अधिक है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: चर्चा कीजिए कि रिलीफ योजना पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक व्यवधानों से भारतीय निर्यातकों को किस प्रकार सुरक्षा प्रदान करती है तथा निर्यात लचीलेपन पर इसके निहितार्थ क्या हैं। उत्तर (50 शब्द): निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत उन्नीस मार्च को चार सौ सत्तानबे करोड़ रुपये से स्वीकृत रिलीफ योजना तीन स्तरों पर जोखिम सुरक्षा देती है: पूर्वव्यापी शत-प्रतिशत बीमा, भावी पंचानबे प्रतिशत कवर, तथा सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों के लिए पचास लाख रुपये सीमा सहित पचास प्रतिशत माल-भाड़ा प्रतिपूर्ति। भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम इसका क्रियान्वयन करता है।
इस विषय की स्थिर तैयारी
इस खबर के पीछे का स्थायी सिलेबस पढ़ें।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
अक्टूबर 2025 में भारत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में किस कार्यकाल के लिए निर्वाचित हुआ?
भारत 14 अक्टूबर 2025 को UNHRC में 2026-2028 कार्यकाल के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुआ, यह परिषद में भारत का सातवां कार्यकाल है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
19 मार्च 2026 को सरकार द्वारा मंजूर RELIEF योजना क्या है?
**RELIEF (रिजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन)** योजना **19 मार्च 2026** को निर्यात संवर्धन मिशन के तहत **₹497 करोड़** के आवंटन के साथ मंजूर की गई। इसे **पश्चिम एशिया तनाव** के कारण बढ़ी माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और युद्ध-संबंधित निर्यात जोखिमों से भारतीय निर्यातकों को बचाने के लिए बनाया गया।
निर्यातकों के लिए RELIEF योजना के तीन घटक क्या हैं?
RELIEF योजना के तीन अलग-अलग घटक हैं: 1. **पूर्वव्यापी 100% जोखिम कवरेज** — **14 फरवरी – 15 मार्च 2026** के बीच भेजी गई बीमित खेपों के लिए 2. **भावी 95% जोखिम कवरेज** — **16 मार्च – 15 जून 2026** के बीच भेजी गई खेपों के लिए (अगले तीन महीने) 3. **MSME प्रतिपूर्ति** — माल ढुलाई और बीमा लागत का **50% तक**, **प्रति निर्यातक ₹50 लाख** की सीमा तक
RELIEF योजना के तहत MSMEs को निर्यात लागत पर कितनी प्रतिपूर्ति मिल सकती है?
RELIEF योजना के तहत, **MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम)** पश्चिम एशिया तनाव के कारण बढ़ी माल ढुलाई और बीमा लागत पर **50% तक प्रतिपूर्ति** का दावा कर सकते हैं। प्रतिपूर्ति **प्रति निर्यातक ₹50 लाख** तक सीमित है। यह प्रावधान खास तौर पर उन छोटे निर्यातकों के लिए है, जिन पर बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत का असर अनुपात से अधिक पड़ता है।
RELIEF योजना को लागू करने की जिम्मेदारी किस एजेंसी की है?
**ECGC लिमिटेड (निर्यात ऋण गारंटी निगम भारत)**, वाणिज्य मंत्रालय के अधीन एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी, RELIEF योजना की **नोडल कार्यान्वयन एजेंसी** है। ECGC दावों का सत्यापन, आवेदनों पर कार्रवाई और पश्चिम एशिया व्यवधानों से प्रभावित पात्र निर्यातकों को धनराशि वितरित करने के लिए जिम्मेदार है।
RELIEF योजना क्यों शुरू की गई और पश्चिम एशिया तनाव से किस प्रकार के निर्यात जोखिम पैदा होते हैं?
RELIEF योजना इसलिए शुरू की गई क्योंकि **पश्चिम एशिया में तनाव** (लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष) से भारतीय निर्यातकों के सामने कई बाधाएँ आईं: - जहाजों को अफ्रीका के रास्ते भेजने के कारण **माल ढुलाई लागत में तेज वृद्धि** - युद्ध-जोखिम क्षेत्र घोषित होने के कारण **समुद्री बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी** - संघर्ष क्षेत्रों में **माल के नुकसान का जोखिम** यह योजना संकट के दौरान भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए **बीमा कवरेज और लागत प्रतिपूर्ति** दोनों देती है।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें