प्रकाशित: 30 दिसंबर 2025टॉपिक
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 79,000 करोड़ रुपये के सैन्य अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दी
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए 79,000 करोड़ रुपये के खरीद प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। इनमें लॉइटर म्यूनिशन प्रणालियाँ, उन्नत नौसैनिक टग, लड़ाकू विमान सिम्युलेटर और अगली पीढ़ी के निगरानी उपकरण शामिल हैं।
परिषद ने 'मेक इन इंडिया' श्रेणी में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की खरीद को भी मंज़ूरी दी। स्वीकृत वस्तुओं की अधिकांश खरीद घरेलू स्रोतों से होने की सूचना दी गई, लेकिन मंज़ूरी में 60% की सटीक हिस्सेदारी निर्धारित नहीं की गई। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1,50,590 करोड़ और रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ रहा। ये मंज़ूरियाँ 2029 तक शुद्ध रक्षा निर्यातक बनने के भारत के लक्ष्य के अनुरूप हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रक्षा अधिग्रहण परिषद के 79,000 करोड़ रुपये के सैन्य खरीद प्रस्ताव क्या हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए 79,000 करोड़ रुपये के खरीद प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। ये प्रस्ताव प्रमुख सैन्य प्रणालियों की खरीद और भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन के लक्ष्य से जुड़े होने के कारण महत्वपूर्ण हैं।
79,000 करोड़ रुपये के सैन्य खरीद प्रस्तावों में कौन-सी प्रमुख प्रणालियाँ शामिल हैं?
इन प्रस्तावों में लॉइटर म्यूनिशन प्रणालियाँ, उन्नत नौसैनिक टग, लड़ाकू विमान सिम्युलेटर और अगली पीढ़ी के निगरानी उपकरण शामिल हैं।
इन खरीद प्रस्तावों में कौन-से प्राधिकरण और सशस्त्र बल शामिल हैं?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए ये प्रस्ताव मंज़ूर किए। स्वीकृत वस्तुओं की अधिकांश खरीद घरेलू स्रोतों से होने की सूचना दी गई, लेकिन मंज़ूरी में 60% की सटीक हिस्सेदारी निर्धारित नहीं की गई।
इन रक्षा खरीद प्रस्तावों से जुड़े प्रमुख आँकड़े क्या हैं?
खरीद प्रस्तावों का कुल मूल्य 79,000 करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1,50,590 करोड़ और रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ रहा।
भारत के लिए इन खरीद प्रस्तावों का व्यापक महत्व क्या है?
ये मंज़ूरियाँ 2029 तक शुद्ध रक्षा निर्यातक बनने के भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाती हैं।