भारत-ब्रिटेन ने विजन 2035 के तहत अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल शुरू किया; ₹7,453 करोड़ का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण मंजूर
Aसीधा उत्तर
भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल शुरू हुआ; ₹7,453 करोड़ का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण मंजूर हुआ; गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास शुरुआती अपतटीय पवन तंत्र विकसित होगा।
मुख्य तथ्य
भारत और ब्रिटेन ने 19 फरवरी 2026 को विजन 2035 की रूपरेखा और चौथे ऊर्जा संवाद के तहत भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल शुरू किया।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी के साथ इस पहल की शुरुआत की।
भारत सरकार ने शुरुआती परियोजनाओं के लिए ₹7,453 करोड़ (लगभग £71 करोड़) की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना मंजूर की।
गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास शुरुआती विकास क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं; पहल का लक्ष्य 70 गीगावाट की अपतटीय पवन क्षमता का उपयोग करना है।
कार्यबल के तीन आधार हैं: अपतटीय पवन क्षेत्र के तंत्र की योजना, बुनियादी ढाँचा और आपूर्ति शृंखलाएँ, तथा मिश्रित वित्त व्यवस्था के ज़रिए वित्तपोषण।
भारत और ब्रिटेन ने 19 फरवरी 2026 को विजन 2035 की रूपरेखा और चौथे ऊर्जा संवाद के तहत भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल शुरू किया। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी के साथ इस पहल की शुरुआत की।
कार्यबल के तीन आधार हैं: अपतटीय पवन क्षेत्र के पूरे तंत्र की योजना और समुद्रतल पट्टों के लिए बेहतर रूपरेखा; बंदरगाहों के आधुनिकीकरण तथा स्थानीय निर्माण के साथ बुनियादी ढाँचे और आपूर्ति शृंखलाओं का विकास; और मिश्रित वित्त व्यवस्था के ज़रिए वित्तपोषण। भारत सरकार ने शुरुआती परियोजनाओं के लिए ₹7,453 करोड़ (लगभग £71 करोड़) की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना मंजूर की। गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास शुरुआती विकास क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं। यह पहल 37 गीगावाट क्षमता वाले शुरुआती अपतटीय पवन तंत्र के विकास में मदद करती है और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2024 भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्य क्या हैं?
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: विजन 2035 के तहत भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल और अपतटीय पवन क्षमता के उपयोग में व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द): 19 फरवरी 2026 को भारत और ब्रिटेन ने विजन 2035 के तहत अपतटीय पवन कार्यबल शुरू किया। इसके तीन आधार योजना, बुनियादी ढाँचा और वित्तपोषण हैं। गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास शुरुआती परियोजनाओं के लिए ₹7,453 करोड़ का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण मंजूर हुआ। इसका लक्ष्य राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी 70 गीगावाट क्षमता का उपयोग करना है।
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फरवरी 2026 में शुरू किया गया भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल क्या है?
भारत और ब्रिटेन ने **19 फरवरी 2026** को **विजन 2035 की रूपरेखा** और **चौथे ऊर्जा संवाद** के तहत **भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल** शुरू किया। इसकी शुरुआत **केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी** और **ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी** ने की।
भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल के तीन आधार क्या हैं?
कार्यबल के तीन आधार हैं: (1) **अपतटीय पवन क्षेत्र के तंत्र की योजना**, जिसमें समुद्रतल पट्टों के लिए बेहतर रूपरेखा शामिल है; (2) **बुनियादी ढाँचा और आपूर्ति शृंखलाएँ**, जिनमें बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और स्थानीय निर्माण शामिल हैं; (3) **वित्तपोषण**, जिसमें अपतटीय पवन परियोजनाओं के लिए मिश्रित वित्त साधन और बीमा व्यवस्था शामिल हैं।
2026 में भारत के अपतटीय पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण के तहत कितनी राशि मंजूर हुई?
भारत सरकार ने अपतटीय पवन परियोजनाओं के लिए **₹7,453 करोड़ का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण** मंजूर किया। अपतटीय पवन ऊर्जा की लागत स्थलीय पवन ऊर्जा से अधिक होती है। यह वित्तपोषण ऊँची लागत और उस टैरिफ़ के बीच का अंतर कम करता है, जिसे वितरण कंपनियाँ वहन कर सकती हैं।
भारत का अपतटीय पवन ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2030 तक अपतटीय पवन ऊर्जा के लिए **37 गीगावाट** का लक्ष्य रखा है। यह 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। भारत की **7,500 किमी लंबी तटरेखा** पर, खासकर गुजरात और तमिलनाडु में, अपतटीय पवन ऊर्जा की काफी संभावना है।
भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन कार्यबल भारत में स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत का अपतटीय पवन क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में है। यह कार्यबल उसे गति देने के लिए **समुद्रतल पट्टों, परियोजना वित्त और आपूर्ति शृंखला विकास** में **ब्रिटेन की विशेषज्ञता** उपलब्ध कराता है। ब्रिटेन अपतटीय पवन ऊर्जा का दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है। भारत के इस क्षेत्र के सामने ऊँची लागत, बंदरगाहों के बुनियादी ढाँचे की कमी और वित्त जुटाने जैसी चुनौतियाँ हैं।
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