भारत और यूरोपीय संघ ने अपने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया। यह समझौता पहली बार 27 जनवरी 2026 को संपन्न हुआ था और इसके प्रमुख विवरण मार्च की शुरुआत में सामने आए। मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत दोनों पक्षों ने प्रारंभिक 5 वर्षों के लिए एक-दूसरे को सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) का दर्जा देने पर सहमति जताई। समझौते में 96.6% से अधिक व्यापारित वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या कम करने का प्रावधान है।

सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई पक्ष किसी तीसरे देश को अधिक अनुकूल व्यापारिक शर्तें देता है, तो उसे वही शर्तें दूसरे पक्ष को भी देनी होंगी। समझौते को लागू होने से पहले कानूनी समीक्षा, यूरोपीय संघ परिषद की स्वीकृति, यूरोपीय संसद की सहमति और भारत के अनुसमर्थन की ज़रूरत है। विश्व आर्थिक मंच ने इसे 'सभी समझौतों की जननी' कहा।