व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद विश्लेषकों ने अमेरिकी और भारतीय बयानों में अहम अंतर बताए। ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने सभी शुल्क शून्य करने और रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने केवल 18% पारस्परिक शुल्क दर की पुष्टि की। प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल आयात बंद करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई।

यह ढाँचा 13 फरवरी 2025 को शुरू हुई द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराता है। भारत ने अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी बाधाएँ दूर करने और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों के आयात पर लाइसेंस की पाबंदियाँ हटाने पर सहमति जताई। Morgan Lewis के विश्लेषण में इसे व्यापक व्यापार समझौते के बजाय शुल्कों में सीमित नरमी बताया गया। Carnegie Endowment ने कहा कि व्यापार से जुड़े बुनियादी मतभेद अब भी बने हुए हैं, इसलिए यह समझौता अमेरिका और भारत के बीच विश्वास अपने-आप बहाल नहीं करेगा।