2 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता की। कई वर्षों के तनाव के बाद यह भारत-कनाडा संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बदलाव माना गया। दोनों नेताओं ने औपचारिक रूप से व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर वार्ता शुरू की, जिसमें केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने संदर्भ शर्तों (ToR) का आदान-प्रदान किया। दोनों देशों ने 2030 तक CAD 70 अरब (लगभग INR 4.65 लाख करोड़) का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य तय किया। वार्ता 2026 के अंत तक पूरी करने का लक्ष्य है।

शिखर सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक परिणाम कनाडा की Cameco Corporation और भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के बीच दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता रहा। इसके तहत Cameco 2027-2035 के बीच लगभग 2.2 करोड़ पाउंड (करीब 10,000 टन) यूरेनियम ओर कॉन्संट्रेट (U3O8) की आपूर्ति बाज़ार से जुड़ी कीमतों पर करेगा — जिसकी कीमत CAD 2.6 अरब (USD 1.9 अरब) है। आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, सांस्कृतिक सहयोग और AICTE-MITACS ग्लोबलिंक रिसर्च इंटर्नशिप कार्यक्रम शामिल हैं।

राजस्थान के संदर्भ में यह यूरेनियम समझौता ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि कनाडा ने 1960 के दशक में चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में राजस्थान परमाणु विद्युत स्टेशन (RAPS) की स्थापना में शुरुआती सहायता दी थी। नई आपूर्ति भारत के विस्तारित परमाणु बेड़े — RAPS इकाइयों सहित — की ज़रूरतें पूरी करने में मदद करेगी।