सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत MSME निर्यातकों के लिए कुल ₹7,295 करोड़ की दो सहायता योजनाएँ शुरू की हैं। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इसे योजना बनाने की प्रक्रिया, बजट प्रावधान, निर्यात ऋण सहायता और MSME वित्त-पोषण के उदाहरण के रूप में पढ़ना उपयोगी है।

पहली योजना ब्याज अनुदान योजना है। इसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक ₹5,181 करोड़ का प्रावधान है और MSME निर्यातकों को निर्यात ऋण पर 2.75% आधार ब्याज अनुदान मिलता है। परीक्षा की दृष्टि से इसका मुख्य बिंदु यह है कि यह निर्यातकों की कर्ज लेने की लागत कम करने से जुड़ी है। इसलिए प्रीलिम्स में योजना का नाम, राशि, अवधि और ब्याज अनुदान की दर सीधे पूछी जा सकती है।

दूसरी योजना जमानत गारंटी योजना है। इसके लिए ₹2,114 करोड़ आवंटित हैं। सूक्ष्म और लघु निर्यातकों को 85% गारंटी कवरेज तथा मध्यम निर्यातकों को 65% गारंटी कवरेज दिया जाता है। यह सीमा प्रति निर्यातक सालाना ₹10 करोड़ तक है। इसका उद्देश्य MSME निर्यातकों के सामने आने वाली जमानत की अड़चन को कम करना है, ताकि निर्यात ऋण तक पहुँच आसान हो सके। दोनों योजनाओं को साथ पढ़ने पर साफ़ होता है कि एक उपाय ब्याज लागत पर काम करता है और दूसरा जमानत की समस्या पर।

स्टैटिक जीके लिंक में MSME, निर्यात प्रोत्साहन, सरकारी सहायता योजनाएँ, ब्याज अनुदान और क्रेडिट गारंटी जैसे शब्द महत्वपूर्ण हैं। मुख्य परीक्षा के लिए यह मुद्दा छोटे उद्योगों की वित्तीय पहुँच, निर्यात प्रतिस्पर्धा और सरकारी हस्तक्षेप के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उत्तर लिखते समय कुल राशि, दोनों घटक, कवरेज और उद्देश्य को साथ जोड़ें।