'भारत की वृक्ष माता' सालुमरदा थिम्मक्का का 114 वर्ष की आयु में निधन
Aसीधा उत्तर
8,000+ बरगद लगाने वाली पद्म श्री पर्यावरणविद् सालुमरदा थिम्मक्का का 114 वर्ष की आयु में निधन।
मुख्य तथ्य
सालुमारदा थिम्मक्का, जिन्हें 'भारत की वृक्ष महिला' और 'वृक्ष माता' के नाम से जाना जाता था, का 15 नवंबर, 2025 को 114 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
उन्होंने 8,000 से अधिक बरगद के पेड़ लगाए और उनकी देखभाल की, जिनमें कर्नाटक के हुलिकल और कुदुर के बीच 4.5 किलोमीटर के दायरे में 385 बरगद के पेड़ भी शामिल हैं।
पर्यावरण के प्रति अपने योगदान के लिए उन्हें 2019 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
अमेरिका में स्थित TREE (थिम्मक्का'स रिसोर्सेज फॉर एनवायरनमेंटल एजुकेशन) संगठन का नाम उनके नाम पर रखा गया है।
उनका जमीनी स्तर का संरक्षण मॉडल राजस्थान में थार रेगिस्तान क्षेत्र में वनीकरण की चुनौतियों के लिए प्रासंगिक है।
भारत की वृक्ष माता के नाम से विख्यात पर्यावरणविद् सालुमरदा थिम्मक्का का 15 नवंबर 2025 को 114 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने जीवनभर में 8,000 से अधिक बरगद के पेड़ लगाए, जिनमें कर्नाटक के हुलिकल और कुदूर के बीच 4.5 किमी में 385 बरगद के पेड़ शामिल हैं।
उन्हें 2019 में पद्म श्री मिला। अमेरिका में TREE संगठन उनके नाम पर है। उनकी विरासत सामुदायिक संरक्षण के महत्व को रेखांकित करती है, जो राजस्थान के थार क्षेत्र में वनीकरण चुनौतियों के लिए भी प्रासंगिक है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2024 राजस्थान के 'पवित्र उपवनों' की व्याख्या कीजिए। — थिम्मक्का का सामुदायिक वनीकरण मॉडल राजस्थान की पवित्र उपवन (ओरण) संरक्षण परंपरा के समानांतर है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: सालुमरदा थिम्मक्का की विरासत और भारत में समुदाय-आधारित वनीकरण के लिए उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए। (10 अंक)
उत्तर (50 शब्द):
भारत की वृक्ष माता और 2019 की पद्म श्री सम्मानित सालुमरदा थिम्मक्का ने आठ हज़ार से अधिक बरगद लगाए, जिनमें कर्नाटक के हुलीकल-कुदुर खंड में तीन सौ पचासी शामिल हैं। अमेरिका का वृक्ष संगठन उन्हीं के नाम पर है। उनका प्रयास राजस्थान के थार और ओरण परंपरा में जनभागीदारी वाले वनीकरण को प्रेरित करता है।
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प्रमुख व्यक्तित्व एवं स्थानसमसामयिकीजैव विविधता एवं संरक्षणविज्ञान एवं प्रौद्योगिकीपुरस्कार, प्रकाशन एवं लेखकसमसामयिकी
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सालुमरदा थिम्मक्का, जो 'भारत की वृक्ष महिला' और 'वृक्ष माता' के रूप में जानी जाती थीं, का 15 नवंबर 2025 को 114 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
वे किस वृक्षारोपण कार्य के लिए प्रसिद्ध थीं?
उन्होंने अपने जीवनकाल में 8,000 से अधिक बरगद के पेड़ लगाए और उनकी देखभाल की, जिनमें कर्नाटक में हुलिकल और कुदूर के बीच 4.5 किमी के हिस्से में 385 बरगद के पेड़ शामिल थे।
उन्हें कौन सा सम्मान मिला और उनका व्यापक प्रभाव क्या था?
उन्हें 2019 में पद्म श्री मिला और उन्होंने दुनिया भर के पर्यावरण आंदोलनों को प्रेरणा दी।
कौन सा संगठन उनके नाम पर रखा गया और संरक्षण से जुड़ा कौन सा सबक बताया गया?
USA में TREE संगठन का नाम उन्हीं पर रखा गया था। समुदाय के नेतृत्व वाले संरक्षण की उनकी विरासत थार मरुस्थल क्षेत्र में राजस्थान की वनीकरण चुनौतियों के लिए प्रासंगिक मॉडल है।
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