पोर्टुलंस इंस्टीट्यूट ने फरवरी 2026 में नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 प्रकाशित किया। इसमें भारत 127 अर्थव्यवस्थाओं में 45वें स्थान पर रहा और उसका स्कोर 54.43/100 दर्ज किया गया। भारत ने पिछली रैंकिंग की तुलना में 4 स्थानों का सुधार किया।

परीक्षा में यह अपडेट इसलिए उपयोगी है, क्योंकि यह डिजिटल तैयारी को तकनीक, लोग, शासन और प्रभाव जैसे स्तंभों से जोड़ता है। नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स तकनीक, लोग, शासन और प्रभाव जैसे 4 स्तंभों पर देशों की स्थिति देखता है। इसलिए परीक्षा की दृष्टि से यह डिजिटल बुनियादी ढांचे, ई-गवर्नेंस, तकनीक अपनाने और नागरिक सेवाओं में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका से जुड़ता है।

भारत की रैंकिंग में सुधार का आधार डिजिटल बुनियादी ढांचे, ई-गवर्नेंस और तकनीक अपनाने में प्रगति बताया गया है। यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान, आधार-आधारित सेवाएं और इंडिया स्टैक डिजिटल इकोसिस्टम भारत की मजबूतियों के रूप में सामने आते हैं। इन बिंदुओं से यह समझने में मदद मिलती है कि डिजिटल सेवाएं प्रशासनिक पहुंच और सेवा-प्रदायगी को कैसे प्रभावित करती हैं। शासन वाले प्रश्नों में इन्हीं उदाहरणों से डिजिटल बुनियादी ढांचे और नागरिक सेवाओं के संबंध को समझाया जा सकता है।

प्रीलिम्स में प्रकाशक, वर्ष, भारत की रैंक, स्कोर, कुल अर्थव्यवस्थाओं की संख्या और 4 स्तंभ सीधे पूछे जा सकते हैं। स्टैटिक जीके से जोड़कर देखें तो यह विषय ई-गवर्नेंस, डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीक आधारित सेवा-प्रदायगी जैसे क्षेत्रों से जुड़ता है। उत्तर लिखते समय भारत के सुधार को सामान्य दावा बनाकर नहीं, बल्कि 45वीं रैंक, 54.43/100 स्कोर और 4 स्थान की बढ़त जैसे ठोस तथ्यों के साथ लिखना चाहिए।