राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 राज्य की अर्थव्यवस्था को 'विकसित राजस्थान @2047' रोडमैप से जोड़कर देखने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें चालू कीमतों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद ₹18.75 लाख करोड़ अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.24% वृद्धि दिखाता है। प्रति व्यक्ति आय ₹2 लाख के स्तर को पार कर ₹2,02,349 तक पहुंची है। परीक्षा की दृष्टि से ये दोनों आंकड़े राज्य की आय, विकास की गति और जीवन-स्तर से जुड़े प्रश्नों के लिए सीधे उपयोगी हैं।

क्षेत्रवार संरचना में सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा हिस्सा रखता है। सेवा क्षेत्र का योगदान 47.7%, उद्योग का 26.5% और कृषि का 25.7% बताया गया है। कृषि से जुड़े तथ्य में खाद्यान्न उत्पादन 283.98 लाख मीट्रिक टन है। इससे राजस्थान की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की प्रधानता, उद्योग की भूमिका और कृषि-आधार, तीनों को एक साथ समझा जा सकता है। स्टैटिक जीके में राज्य की अर्थव्यवस्था, कृषि, खनन, ऊर्जा और पर्यटन पढ़ते समय यह संरचना उपयोगी बैकग्राउंड देती है।

प्रमुख संकेतकों में मुद्रास्फीति 4.8% है, राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का करीब 4.3% है और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 31,500 मेगावाट से अधिक बताई गई है। महिला श्रम बल भागीदारी दर 54.1% और स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे में 1.36 करोड़ परिवारों का उल्लेख भी सामाजिक-आर्थिक पक्ष को जोड़ता है। प्लेटफ़ॉर्म-आधारित गिग कामगारों के पंजीकरण को लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य बताया गया है। RAS और UPSC जैसे पाठ्यक्रमों में इन आंकड़ों से बजट-आधारित उत्तरों में सामाजिक सुरक्षा, श्रम सुधार, ऊर्जा विस्तार और राज्य-विशेष उदाहरण जोड़े जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे समावेशी विकास, राजकोषीय प्रबंधन और कल्याणकारी योजनाओं के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।