प्रकाशित: 14 अक्टूबर 2025विज्ञान-प्रौद्योगिकी
मिशन दृष्टि: GalaxEye का बहु-सेंसर उपग्रह 2026 की पहली तिमाही में प्रक्षेपित होगा
IIT मद्रास के पूर्व छात्रों ने बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप GalaxEye Space की स्थापना की थी। कंपनी ने मिशन दृष्टि की घोषणा की है। मिशन के तहत दुनिया का पहला ऐसा बहु-सेंसर पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह भेजा जाएगा, जिसमें सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और ऑप्टिकल सेंसर एक साथ लगे होंगे। 160 किलोग्राम वज़नी इस उपग्रह का रिज़ॉल्यूशन 1.5 मीटर होगा और इसे 2026 की पहली तिमाही में प्रक्षेपित किया जाना है।
OptoSAR तकनीक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और SAR सेंसरों से मिले डेटा को उपग्रह पर ही AI की मदद से संसाधित करती है। इससे हर मौसम में पृथ्वी की तस्वीरें तुरंत ली जा सकती हैं। इसका उपयोग रक्षा, आपदा प्रबंधन, कृषि, बुनियादी ढाँचे और वित्तीय जोखिम के आकलन में होगा। GalaxEye की योजना 2029 तक 8-12 उपग्रहों का समूह बनाने की है, ताकि दुनिया भर की तस्वीरें लगभग तुरंत उपलब्ध हो सकें। यह मिशन दिखाता है कि अंतरिक्ष नीति में उदारीकरण के बाद भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र आगे बढ़ रहा है।
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गैलेक्सआई स्पेस के 'मिशन दृष्टि' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह SAR और ऑप्टिकल सेंसर को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर जोड़ने वाला मल्टी-सेंसर पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह है।
2. उपग्रह का लॉन्च मास लगभग 190 किग्रा है और यह लगभग 1.8 मीटर की इमेजरी देता है।
3. गैलेक्सआई स्पेस की स्थापना IIT मद्रास के इंजीनियरों की एक टीम ने की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Dतकनीकी विवरण अपडेट करने के बाद तीनों कथन सही हैं। गैलेक्सआई के अनुसार मिशन दृष्टि OptoSAR पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह है, जो SAR और MSI/ऑप्टिकल सेंसर को एक प्लेटफ़ॉर्म पर जोड़ता है। गैलेक्सआई बताता है कि कंपनी की स्थापना IIT मद्रास के इंजीनियरों ने की थी, और eoPortal मिशन दृष्टि का लॉन्च मास लगभग 190 किग्रा बताता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मिशन दृष्टि क्या है और GalaxEye का बहु-सेंसर उपग्रह क्या है?
**मिशन दृष्टि के तहत GalaxEye भारत का पहला वाणिज्यिक बहु-सेंसर उपग्रह प्रक्षेपित करेगा।** इसमें **सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और ऑप्टिकल इमेजिंग सेंसर** एक साथ लगे होंगे। इसे **2026 की पहली तिमाही में प्रक्षेपित किया जाना है।** यह हर मौसम में दिन-रात पृथ्वी का अवलोकन कर सकेगा और कृषि, आपदा प्रबंधन, समुद्री निगरानी तथा शहरी नियोजन में काम आएगा।
GalaxEye क्या है और भारत के अंतरिक्ष स्टार्टअप क्षेत्र में इसकी क्या भूमिका है?
**GalaxEye, IIT मद्रास में विकसित ऐसा अंतरिक्ष स्टार्टअप है जो उन्नत तकनीक पर काम करता है** और **पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह तकनीक** में विशेषज्ञता रखता है। भारत में ISRO-केंद्रित व्यवस्था बदलने और अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद GalaxEye ऐसी **नई पीढ़ी की भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों** में शामिल है, जो भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के ढाँचे के तहत वाणिज्यिक उपग्रह बनाती और प्रक्षेपित करती हैं।
सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) उपग्रह तकनीक क्या है और भारत के लिए इसका क्या महत्व है?
**सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) ऐसी रडार तकनीक है जो माइक्रोवेव संकेतों से बादल, धुएँ या अँधेरे के बावजूद साफ़ और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें बनाती है।** भारत में यह **मानसून की बाढ़, फसलों की स्थिति, ग्लेशियरों में बदलाव, सीमाओं की निगरानी और आपदा से निपटने** के लिए बहुत ज़रूरी है। बादलों के कारण ऑप्टिकल उपग्रह इन परिस्थितियों में उपयोगी तस्वीरें नहीं ले पाते।
मिशन दृष्टि के तहत GalaxEye का उपग्रह कब और किस रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाना है?
**मिशन दृष्टि के तहत GalaxEye का उपग्रह 2026 की पहली तिमाही में प्रक्षेपित किया जाना है।** इसके लिए संभवतः **ISRO के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV)** या किसी वाणिज्यिक प्रक्षेपण कंपनी के रॉकेट का उपयोग होगा। उपग्रह को **निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO)** में ऐसी ऊँचाई पर रखा जाएगा जो उच्च-रिज़ॉल्यूशन पृथ्वी-अवलोकन के अनुकूल हो। यह SAR और ऑप्टिकल इमेजिंग को एक साथ जोड़ने वाला पहला भारतीय वाणिज्यिक उपग्रह होगा।
IN-SPACe क्या है और यह GalaxEye जैसी भारतीय वाणिज्यिक अंतरिक्ष कंपनियों की सहायता कैसे करता है?
**भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की स्थापना 2020 में हुई थी। यह निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एक ही जगह सभी मंज़ूरियाँ देने वाली प्रमुख एजेंसी है।** यह एजेंसी निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को मंज़ूरी देती है, उन्हें बढ़ावा देती है और उनका समर्थन करती है। इस व्यवस्था के तहत GalaxEye जैसी कंपनियाँ वाणिज्यिक उपग्रह मिशनों के लिए **ISRO की सुविधाओं, प्रक्षेपण यानों और आवंटित स्पेक्ट्रम** का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसने पहले की ISRO-केंद्रित एकाधिकार व्यवस्था की जगह ली।