प्रकाशित: 10 अक्टूबर 2025अर्थव्यवस्था
सूक्ष्म वित्त ऋण चूक में उछाल: PAR 30+ FY25 में 6.2% पर पहुँचा
FY25 में सूक्ष्म वित्त ऋणों में चूक तेजी से बढ़ी — 30+ दिन अतिदेय (PAR 30+) FY24 के 2.1% से बढ़कर 6.2% हो गया और NPA (90+ दिन) 1.6% से बढ़कर 4.8% हो गया। बिहार ₹57,712 करोड़ बकाया ऋण और 7.2% चूक दर के साथ सबसे आगे रहा; ग्रामीण उधारकर्ताओं की चूक दर 6.4% रही।
इसके मुख्य कारण अत्यधिक उधारी, एक ही उधारकर्ता पर कई ऋणों का बोझ और ग्रामीण आर्थिक तनाव हैं। RBI ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के दिशानिर्देश कड़े किए और प्रत्येक उधारकर्ता का कुल ऋण ₹3 लाख तक सीमित किया। राजस्थान का सूक्ष्म वित्त पोर्टफोलियो ₹18,500 करोड़ (PAR 30+ 4.8%) था, जो उदयपुर, डूंगरपुर और बाँसवाड़ा की जनजातीय पट्टी के जिलों में केंद्रित था।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
FY25 में माइक्रोफाइनेंस ऋण चूक का क्या हुआ?
**FY25 में माइक्रोफाइनेंस ऋण चूक में तीव्र वृद्धि हुई, PAR 30+ (30+ दिन अतिदेय ऋण) FY24 में 2.1% से बढ़कर 6.2% हो गया,** और NPA (90+ दिन अतिदेय) 1.6% से 4.8% पर पहुँच गया। यह वृद्धि अत्यधिक उधार, एकाधिक ऋण ओवरलैप और ग्रामीण आर्थिक तनाव के कारण है।
माइक्रोफाइनेंस चूक को संबोधित करने के लिए RBI ने क्या किया?
**RBI ने माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के लिए दिशानिर्देश कड़े किए, कुल उधारकर्ता ऋणग्रस्तता को 3 लाख रुपये तक सीमित किया** ताकि अत्यधिक ऋण देने से बचा जा सके। यह विनियामक कार्रवाई FY25 में PAR 30+ दरों में 2.1% से 6.2% तक की वृद्धि और बढ़ते NPA के जवाब में की गई।
माइक्रोफाइनेंस बकाया ऋणों में कौन सा राज्य आगे है?
**माइक्रोफाइनेंस बकाया ऋणों में बिहार 57,712 करोड़ रुपये के साथ आगे है** और इसकी अपराध दर 7.2% है। ग्रामीण उधारकर्ताओं ने समग्र रूप से 6.4% अपराध दर दिखाई। चूक में वृद्धि अत्यधिक ऋण, एकाधिक ऋण ओवरलैप और ग्रामीण आर्थिक तनाव के कारण है।
राजस्थान की माइक्रोफाइनेंस स्थिति क्या है?
**राजस्थान का माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो 18,500 करोड़ रुपये था और PAR 30+ 4.8% था,** जो उदयपुर, डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जनजाति पट्टी जिलों में केंद्रित था। राष्ट्रीय PAR 30+ FY25 में 6.2% था, जो दर्शाता है कि राजस्थान राष्ट्रीय औसत से नीचे लेकिन फिर भी ऊंचा है।
माइक्रोफाइनेंस में PAR 30+ क्या है?
**PAR 30+ (Portfolio at Risk 30+)** एक प्रमुख माइक्रोफाइनेंस मेट्रिक है जो 30 दिनों से अधिक अतिदेय भुगतान वाले ऋणों के प्रतिशत को मापता है। FY25 में भारत का PAR 30+ FY24 में 2.1% से तेजी से बढ़कर **6.2%** हो गया, जो माइक्रोफाइनेंस ऋण गुणवत्ता में गंभीर गिरावट का संकेत देता है।