आईएनएस सह्याद्रि 9 नवंबर 2025 को जारी पीआईबी सूचना के अनुसार उत्तरी प्रशांत के गुआम में मालाबार अभ्यास 2025 में भाग लेने के लिए मौजूद था। यह अपडेट भारत की समुद्री सुरक्षा कूटनीति, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी और क्वाड देशों के बीच नौसैनिक तालमेल के कारण परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मालाबार अभ्यास में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएं शामिल हैं, इसलिए यह केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सहयोग का संकेत भी है।
मालाबार अभ्यास की शुरुआत 1992 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। बाद में इसका स्वरूप चतुर्पक्षीय हो गया और 2025 संस्करण गुआम के आसपास आयोजित हुआ। उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार 2025 संस्करण में हार्बर चरण में संचालन योजना, संचार प्रोटोकॉल पर तालमेल, एक-दूसरे के जहाजों से परिचय और खेल गतिविधियां शामिल थीं। इसके बाद समुद्री चरण में जहाजों और विमानों ने संयुक्त बेड़ा संचालन, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, गनरी अभ्यास और उड़ान संचालन से जुड़ी नौसैनिक ड्रिल में भाग लेना था। 2025 संस्करण का फोकस पनडुब्बी-रोधी युद्ध, सतही युद्ध और वायु रक्षा संचालन पर भी था।
आईएनएस सह्याद्रि को पीआईबी ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट बताया है। यह शिवालिक श्रेणी का स्टेल्थ फ्रिगेट भी है और 2012 में कमीशन हुआ था। स्टैटिक जीके के लिए यहां युद्धपोतों की श्रेणियां, नौसैनिक अभ्यासों का विकास, क्वाड की संरचना और हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा जैसे विषय जुड़ते हैं। मुख्य परीक्षा में यह विषय भारत की रक्षा कूटनीति, साझेदार देशों के साथ आपसी संचालन क्षमता और साझा समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा के उदाहरण के रूप में उपयोगी है।
