भारत सरकार ने 10 जनवरी 2026 को घोषणा की कि वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रौद्योगिकी 2026 के अंत तक देशभर में लागू की जाएगी। V2V वाहनों को दूरसंचार विभाग द्वारा अनुमोदित विशेष रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड (5.875-5.905 GHz) का उपयोग करके गति, स्थान, दिशा और ब्रेकिंग स्थिति से जुड़े डेटा का सीधे आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाती है।

भारत में सड़क दुर्घटनाओं से मृत्यु दर दुनिया में सबसे अधिक है। V2V तकनीक राजमार्गों पर पीछे से होने वाली टक्कर, कोहरे के कारण होने वाली टक्करों और खड़े वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में विशेष रूप से प्रभावी है। परियोजना की अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये है। यह तकनीक राजस्थान और उत्तर भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां सर्दियों में घना कोहरा अक्सर बहु-वाहन दुर्घटनाओं का कारण बनता है।