प्रकाशित: 9 जनवरी 2026समाचार स्रोतटॉपिक
सरकार ने सड़क दुर्घटनाएं कम करने के लिए 2026 के अंत तक V2V संचार प्रौद्योगिकी लागू करने की घोषणा की
भारत सरकार ने 10 जनवरी 2026 को घोषणा की कि वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रौद्योगिकी 2026 के अंत तक देशभर में लागू की जाएगी। V2V वाहनों को दूरसंचार विभाग द्वारा अनुमोदित विशेष रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड (5.875-5.905 GHz) का उपयोग करके गति, स्थान, दिशा और ब्रेकिंग स्थिति से जुड़े डेटा का सीधे आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाती है।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं से मृत्यु दर दुनिया में सबसे अधिक है। V2V तकनीक राजमार्गों पर पीछे से होने वाली टक्कर, कोहरे के कारण होने वाली टक्करों और खड़े वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में विशेष रूप से प्रभावी है। परियोजना की अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये है। यह तकनीक राजस्थान और उत्तर भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां सर्दियों में घना कोहरा अक्सर बहु-वाहन दुर्घटनाओं का कारण बनता है।
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प्रश्न: सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए वाहन-से-वाहन संचार प्रौद्योगिकी के 2026 के अंत तक राष्ट्रव्यापी रोलआउट की घोषणा की। भारतीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा बढ़ाने में वी2वी प्रौद्योगिकी की भूमिका पर चर्चा करें।
उत्तर (50 शब्द):
10 जनवरी 2026 को सरकार ने 2026 के अंत तक 5,000 करोड़ रुपये की वाहन-से-वाहन संचार प्रौद्योगिकी के राष्ट्रव्यापी रोलआउट की घोषणा की। वी2वी दूरसंचार विभाग द्वारा स्वीकृत 5.875-5.905 गीगाहर्ट्ज़ बैंड का उपयोग कर वाहनों के बीच गति, स्थान एवं ब्रेक लगाने से जुड़ा डेटा साझा करने की सुविधा देती है और कोहरे में होने वाली दुर्घटनाएँ रोकती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के लिए घोषित वाहन-से-वाहन (V2V) संचार तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है?
**वाहन-से-वाहन (V2V) संचार तकनीक** में वाहन **दूरसंचार विभाग** द्वारा अनुमोदित **विशेष रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड (5.875-5.905 GHz)** का उपयोग करके — बिना मोबाइल इंटरनेट के — **गति, स्थान, दिशा और ब्रेक लगाने से जुड़ा डेटा** सीधे आपस में साझा कर सकते हैं। सरकार ने **10 जनवरी 2026** को इसे **2026 के अंत तक पूरे देश में लागू** करने की घोषणा की; अनुमानित लागत **₹5,000 करोड़** है।
जनवरी 2026 में घोषित भारत की V2V संचार तकनीक की अनुमानित लागत और लागू करने की समयसीमा क्या है?
भारत की **V2V तकनीक** को **10 जनवरी 2026** को **2026 के अंत तक पूरे देश में लागू** करने की घोषणा हुई। परियोजना की अनुमानित लागत **₹5,000 करोड़** है। यह **दूरसंचार विभाग** द्वारा अनुमोदित **5.875-5.905 GHz** फ्रीक्वेंसी बैंड का उपयोग करती है। इसका लक्ष्य **पीछे से टक्कर, कोहरे के कारण होने वाली टक्कर** और खड़े वाहनों से दुर्घटनाएं रोकना है।
V2V तकनीक राजस्थान और उत्तर भारत की राजमार्ग सुरक्षा के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक क्यों है?
**V2V तकनीक** **राजस्थान और उत्तर भारत** के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहां **सर्दियों का घना कोहरा** अक्सर **राजमार्गों पर बहु-वाहन दुर्घटनाओं** का कारण बनता है। V2V में वाहनों के बीच **5.875-5.905 GHz** रेडियो फ्रीक्वेंसी (बिना मोबाइल इंटरनेट) से **गति, स्थान और ब्रेक लगाने से जुड़ा डेटा** रियल-टाइम में साझा होता है। **₹5,000 करोड़** की परियोजना **2026 के अंत तक** पूरे देश में लागू होगी।
V2V संचार तकनीक भारत में किस तरह की सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लाई गई है?
**V2V संचार तकनीक** (2026 के अंत तक राष्ट्रव्यापी, 10 जनवरी 2026) इन दुर्घटनाओं को रोकने में प्रभावी है: **पीछे से होने वाली टक्करें**, **कोहरे में राजमार्ग पर कई वाहनों वाली दुर्घटनाएं**, और **खड़े वाहनों से टक्करें**। यह **5.875-5.905 GHz** बैंड पर बिना मोबाइल इंटरनेट के गति, स्थान, दिशा और ब्रेकिंग डेटा साझा करती है। **₹5,000 करोड़** की यह परियोजना भारत में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली ऊंची मृत्यु दर से निपटने के लिए है।
भारत में V2V संचार तकनीक के लिए कौन सा फ्रीक्वेंसी बैंड अनुमोदित किया गया है?
**दूरसंचार विभाग (DoT)** ने भारत में **वाहन से वाहन (V2V) संचार** के लिए **5.875-5.905 GHz रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड** अनुमोदित किया है। इस बैंड से वाहन बिना मोबाइल इंटरनेट के **गति, स्थान, दिशा और ब्रेकिंग डेटा** साझा कर सकते हैं। **10 जनवरी 2026** को **₹5,000 करोड़** की परियोजना के साथ इसे **2026 के अंत तक राष्ट्रव्यापी** लागू करने की घोषणा हुई। **राजस्थान** और उत्तर भारत इससे सर्वाधिक लाभान्वित होंगे।