भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 17 अक्टूबर 2025 को समाप्त सप्ताह में फिर 700 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर से ऊपर पहुंचकर 702.28 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। RBI के साप्ताहिक आंकड़ों के आधार पर यह वृद्धि 4.496 अरब अमेरिकी डॉलर की थी और यह लगातार तीसरी साप्ताहिक बढ़ोतरी रही। यह तथ्य अर्थव्यवस्था के विद्यार्थियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार बाह्य क्षेत्र की मजबूती, मुद्रा स्थिरता और वैश्विक झटकों से निपटने की तैयारी का प्रमुख संकेतक माना जाता है।
इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण सोने के भंडार के मूल्य में तेज उछाल था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोने के भंडार का मूल्य 6.181 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 108.546 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इसी दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 1.692 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 570.411 अरब अमेरिकी डॉलर रहीं। इसका अर्थ है कि कुल भंडार में वृद्धि सभी घटकों में समान बढ़ोतरी से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से सोने के मूल्यांकन में आए उछाल से हुई। सोने की कीमत 4,017 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 4,251 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस बताई गई, जिससे भारत के स्वर्ण भंडार का डॉलर मूल्य बढ़ा।
परीक्षा में इसे RBI की डॉलर खरीद-बिक्री, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सोने के मूल्यांकन के साथ पढ़ना चाहिए। विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, विशेष आहरण अधिकार और IMF में रिजर्व पोजिशन जैसे घटक शामिल होते हैं। RBI रुपये में तेज उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए डॉलर खरीद-बिक्री करता है; इसलिए कुल भंडार बढ़ने के बावजूद विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कमी आ सकती है। प्रीलिम्स में तिथि, राशि, मुख्य कारण और घटक पूछे जा सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में विदेशी मुद्रा भंडार को बाह्य क्षेत्र की मजबूती, वैश्विक झटकों से बचाव और मुद्रा स्थिरता से जोड़कर समझना उपयोगी है।
