प्रकाशित: 9 अक्टूबर 2025Al Jazeeraअंतरराष्ट्रीय
चीन ने दुर्लभ मृदा निर्यात नियंत्रण कड़े किए; भारत के EV और रक्षा क्षेत्र पर प्रभाव
चीन ने अक्टूबर 2025 में पाँच अतिरिक्त दुर्लभ मृदा धातुओं — होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, यूरोपियम और इटरबियम — पर निर्यात नियंत्रण लागू किया। वैश्विक दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण का लगभग 90% हिस्सा चीन के नियंत्रण में है।
बीजिंग ने भारत से लिखित गारंटी माँगी कि भारी दुर्लभ मृदा चुंबकों का उपयोग केवल घरेलू उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। FY2025 में 870 टन दुर्लभ मृदा चुंबक का उपभोग करने वाले भारत ने यह माँग स्वीकार नहीं की। इन नियंत्रणों में बाह्य-क्षेत्रीय प्रावधान शामिल हैं। भारत के EV, नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र तुरंत आपूर्ति की कमजोरी का सामना कर रहे हैं।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा एवं रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए चीन के कड़े दुर्लभ-मृदा निर्यात नियंत्रण के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
चीन ने अक्टूबर 2025 में पाँच दुर्लभ-मृदा धातुओं — होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, यूरोपियम, यटरबियम — पर निर्यात नियंत्रण लगाए और इन्हें पहले से प्रतिबंधित सात धातुओं में जोड़ दिया। वैश्विक प्रसंस्करण के लगभग 90 प्रतिशत पर नियंत्रण रखने वाले बीजिंग ने पुनः-निर्यात गारंटियाँ माँगीं, जिन्हें भारत ने अस्वीकार किया। वित्त वर्ष 2024-25 में 870 टन का उपभोक्ता होने के कारण भारत भेद्य है।
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजअंतरराष्ट्रीयविषयआर्थिकपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतAl Jazeera
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नमध्यम
चीन ने अक्टूबर 2025 में कितनी अतिरिक्त दुर्लभ मृदा धातुओं पर प्रतिबंध लगाया?
व्याख्या · सही उत्तर Aचीन ने 5 दुर्लभ मृदा धातुओं (होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, यूरोपियम, इटरबियम) पर निर्यात नियंत्रण लगाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अक्टूबर 2025 में चीन ने किन पांच अतिरिक्त दुर्लभ-पृथ्वी धातुओं पर निर्यात नियंत्रण लगाए?
चीन ने अक्टूबर 2025 में होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, युरोपियम और इटरबियम पर निर्यात नियंत्रण घोषित किए। ये नियंत्रण पहले प्रतिबंधित सात खनिजों के अतिरिक्त थे।
दुर्लभ-पृथ्वी प्रसंस्करण का कितना हिस्सा चीन नियंत्रित करता है?
चीन दुनिया में दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों के प्रसंस्करण का लगभग 90 प्रतिशत नियंत्रित करता है।
बीजिंग ने भारत से कौन सी गारंटी मांगी और भारत ने क्या जवाब दिया?
बीजिंग ने लिखित गारंटी मांगी कि भारी दुर्लभ-पृथ्वी चुंबकों का उपयोग केवल घरेलू उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और उनका पुनर्निर्यात नहीं होगा। वित्त वर्ष 2025 में 870 टन दुर्लभ-पृथ्वी चुंबकों की खपत करने वाले भारत ने यह मांग स्वीकार नहीं की।
चीन के बाहर बने उत्पादों और भारत के क्षेत्रों पर इन नियंत्रणों का क्या असर पड़ता है?
इन नियंत्रणों में बाह्य-क्षेत्रीय प्रावधान शामिल हैं। इनके तहत, चीन के बाहर बने जिन उत्पादों में चीनी मूल की दुर्लभ-पृथ्वी सामग्री है, उनके लिए भी निर्यात लाइसेंस चाहिए। भारत के इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों को तुरंत आपूर्ति संबंधी कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है।