ISRO पुष्पक पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV) के लिए उन्नत सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट (CMC) का परीक्षण कर रहा है, ताकि 2026 में नियोजित कक्षीय वापसी परीक्षण के दौरान यह 2000 डिग्री सेल्सियस से अधिक के पुनः प्रवेश तापमान को सह सके। जून 2024 में RLV-LEX-03 परीक्षण ने तेज हवा में लैंडिंग की स्थितियों को मान्य किया था।

पुष्पक क्षैतिज रनवे लैंडिंग वाला, स्पेसप्लेन जैसी बनावट का प्रौद्योगिकी प्रदर्शक है। भारत के अगली पीढ़ी के NGLV सूर्य में पुनः प्रयोज्य प्रथम चरण होगा और इसका लक्ष्य 30 टन LEO क्षमता हासिल करना है। प्रमुख चुनौतियों में सटीक स्वायत्त लैंडिंग (सब-मीटर सटीकता) और इंजन को फिर से चालू करने की क्षमता शामिल हैं। भारत पुनः उपयोगिता के ज़रिए कक्षीय प्रक्षेपण लागत में बड़ी कमी लाना चाहता है।