प्रकाशित: 20 जनवरी 2026टॉपिक
ISRO ने पुष्पक पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान के लिए सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट का परीक्षण किया
ISRO पुष्पक पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV) के लिए उन्नत सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट (CMC) का परीक्षण कर रहा है, ताकि 2026 में नियोजित कक्षीय वापसी परीक्षण के दौरान यह 2000 डिग्री सेल्सियस से अधिक के पुनः प्रवेश तापमान को सह सके। जून 2024 में RLV-LEX-03 परीक्षण ने तेज हवा में लैंडिंग की स्थितियों को मान्य किया था।
पुष्पक क्षैतिज रनवे लैंडिंग वाला, स्पेसप्लेन जैसी बनावट का प्रौद्योगिकी प्रदर्शक है। भारत के अगली पीढ़ी के NGLV सूर्य में पुनः प्रयोज्य प्रथम चरण होगा और इसका लक्ष्य 30 टन LEO क्षमता हासिल करना है। प्रमुख चुनौतियों में सटीक स्वायत्त लैंडिंग (सब-मीटर सटीकता) और इंजन को फिर से चालू करने की क्षमता शामिल हैं। भारत पुनः उपयोगिता के ज़रिए कक्षीय प्रक्षेपण लागत में बड़ी कमी लाना चाहता है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
श्रीहरिकोटा से ISRO का LVM3-M6 ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 कौन-से क्रमांक का प्रक्षेपण था?
व्याख्या · सही उत्तर Aएलवीएम3-एम6 मिशन श्रीहरिकोटा से इसरो का 104वाँ प्रक्षेपण था। इसरो ने इस प्रक्षेपण तक 34 देशों के 434 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ISRO ने Pushpak पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान के लिए किस सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट का परीक्षण किया?
**ISRO** ने **Pushpak पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV)** के लिए **सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट (CMC)** — उन्नत उच्च-तापमान सामग्री — का सफल परीक्षण किया। CMC वायुमंडलीय पुनः प्रवेश के दौरान **1,600 डिग्री सेल्सियस से अधिक** तापमान सहन कर सकते हैं और धातु मिश्र धातुओं से हल्के होते हैं।
Pushpak पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV) क्या है और इसका क्या महत्व है?
**Pushpak** ISRO का **पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (RLV)** है — भारत के अंतरिक्ष शटल जैसे वाहन का प्रोटोटाइप, जो प्रक्षेपण के बाद वायुमंडल में पुनः प्रवेश करके अपने आप उतर सकता है। **चित्रदुर्ग** में इसके कई रनवे लैंडिंग प्रयोग (RLV-LEX) सफल रहे हैं। इस कार्यक्रम का लक्ष्य SpaceX के Falcon 9 की तरह **उपग्रह प्रक्षेपण लागत** कम करना है।
पुनः प्रयोज्य अंतरिक्ष यान के लिए सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट (CMC) क्यों महत्वपूर्ण हैं?
**सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट (CMC)** पुनः प्रयोज्य अंतरिक्ष यान के लिए बहुत उपयोगी हैं: ये **1,600 डिग्री C से अधिक** तापमान सहन कर सकते हैं, सुपरऑलॉय से **30-40% हल्के** होते हैं, थर्मल शॉक के प्रति इनका प्रतिरोध अधिक होता है और ये कई पुनः प्रवेश चक्रों में संरचना को सुरक्षित बनाए रखते हैं। इसलिए ये **थर्मल सुरक्षा प्रणालियों (TPS)** के लिए आवश्यक हैं।
भारत के RLV कार्यक्रम की तुलना वैश्विक पुनः प्रयोज्य प्रक्षेपण यान प्रयासों से कैसे होती है?
भारत का **Pushpak RLV** अभी शुरुआती प्रोटोटाइप चरण में है। SpaceX का **Falcon 9** 200 से अधिक सफल लैंडिंग और पुनः उपयोग कर चुका है। **ESA का Themis** और चीन के पुनः प्रयोज्य रॉकेट कार्यक्रम भी विकास के चरण में हैं। भारत की स्वदेशी **CMC और TPS प्रौद्योगिकी** अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की दीर्घकालिक लागत-प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण है।
ISRO अपने अंतरिक्ष यान के लिए और कौन सी उन्नत सामग्री विकसित कर रहा है?
**CMC** के अलावा ISRO **कार्बन-कार्बन (C-C) कंपोजिट** (रॉकेट नोजल के लिए), **एब्लेटिव सामग्री** (ताप सुरक्षा के लिए), **मेटल मैट्रिक्स कंपोजिट (MMC)** और **एयरोजेल इंसुलेशन** विकसित करता है। **VSSC (विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र)**, तिरुवनंतपुरम में **ISRO सामग्री विज्ञान प्रयोगशाला** इन सामग्रियों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाती है।