11 सितंबर 2025 को वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून परिसर के ब्रैंडिस रोड स्थित फॉरेस्टर मेमोरियल पर राष्ट्रीय वन शहीद दिवस मनाया गया, ताकि उन वनकर्मियों को याद किया जा सके जिन्होंने वन और वन्य जीवन की सुरक्षा के लिए अपना जीवन दिया। समारोह की शुरुआत वन शहीदों के सम्मान में दो मिनट के मौन से हुई। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक श्रीमती कंचन देवी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) के निदेशक डॉ. जगमोहन शर्मा, वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ. रेनू सिंह, सेंट्रल एकेडमी स्टेट फॉरेस्ट सर्विस (CASFoS) के प्रिंसिपल, तथा IFS प्रशिक्षु, ICFRE/FRI के वरिष्ठ अधिकारी व वैज्ञानिक एवं CASFoS के प्रशिक्षुओं ने पुष्पांजलि अर्पित की। 11 सितंबर को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2013 में राजस्थान के 1730 के खेजड़ली नरसंहार की स्मृति में चुनी थी। उस दिन जोधपुर के पास रेगिस्तानी गाँव खेजड़ली में मारवाड़ के महाराजा अभय सिंह के आदेश पर खेजड़ी के पेड़ों को काटे जाने का विरोध करते हुए अमृता देवी बिश्नोई व बिश्नोई समुदाय के 362 अन्य सदस्य बलिदान हुए। उनका अहिंसक प्रतिरोध विश्व के प्रारंभिक दस्तावेज़ीकृत पर्यावरण संरक्षण आंदोलनों में से एक माना जाता है और आधुनिक संरक्षण नैतिकता को प्रेरित करता है। भारत सरकार का अमृता देवी बिश्नोई वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार वन्यजीव संरक्षण में लगे व्यक्तियों व संस्थानों को सम्मानित करता रहता है। 2025 का यह आयोजन भावी पीढ़ियों के लिए भारत के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व सुरक्षा के प्रति वन सेवाओं की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करता है।