17 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में गति शक्ति विश्वविद्यालय और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्मार्ट तकनीकी समाधान विकसित करना है। परीक्षा की दृष्टि से इसका महत्व इस बात में है कि रक्षा तैयारी अब सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, परिवहन-आधारित माल-ढुलाई और त्वरित तैनाती क्षमता से सीधे जुड़ रही है।

समझौता ज्ञापन सहयोगी अध्ययन और अनुसंधान एवं विकास का आधार बनेगा। इसके प्रमुख क्षेत्रों में माल-ढुलाई प्रबंधन, सामरिक, संचालनात्मक और रणनीतिक स्तर पर माल-ढुलाई योजनाओं का विश्लेषण और सत्यापन, चिप डिजाइन, हार्डवेयर सुरक्षा तथा होमोमॉर्फिक और ब्लॉकचेन-आधारित एन्क्रिप्शन शामिल हैं। यह सहयोग AI-आधारित निगरानी, सीमा सुरक्षा के लिए स्वायत्त प्रणालियों और सैन्य माल-ढुलाई के लिए उन्नत संचार नेटवर्क से भी जुड़ा है। इससे साफ होता है कि रक्षा तैयारी में अब केवल हथियार प्रणालियां नहीं, बल्कि डेटा, संचार, सुरक्षित हार्डवेयर और त्वरित तैनाती की क्षमता भी अहम हो रही है।

इस समझौते में शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की क्षमता बढ़ाने, संयुक्त शोध, सेमिनार, सम्मेलन, क्षमता निर्माण और गोलमेज कार्यशालाओं पर भी जोर है। गति शक्ति विश्वविद्यालय 2022 में संसद के अधिनियम से केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ था और परिवहन तथा माल-ढुलाई क्षेत्र में भारत का पहला विश्वविद्यालय है।

स्थिर सामान्य ज्ञान से इसका संबंध रक्षा प्रौद्योगिकी, आत्मनिर्भर भारत, नागरिक-सैन्य प्रौद्योगिकी सहयोग, सुरक्षित संचार और परिवहन अवसंरचना से बनता है। प्रारंभिक परीक्षा में तिथि, संस्थान, उद्देश्य और तकनीकी क्षेत्रों पर सवाल आ सकते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की तैनाती, राष्ट्रीय सुरक्षा में विश्वविद्यालयों की भूमिका और नागरिक विशेषज्ञता के रक्षा उपयोग पर विश्लेषण पूछा जा सकता है।