मुख्य तथ्य

  • प्राकृतिक वनस्पति वह पौधा आवरण है जो मुख्यतः जलवायु, मिट्टी, स्थलरूप, जल-निकास और जैविक दबाव से बिना नियोजित खेती के विकसित होता है।
  • अमेजन-कांगो भूमध्यरेखीय वर्षावन गर्म-आर्द्र जलवायु में सदाबहार, बहु-स्तरीय और अत्यधिक जैव-विविध वन बनाता है।
  • मानसूनी उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन मौसमी होता है; साल, सागौन और अन्य चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष सूखे महीनों में पत्ते गिराते हैं।
  • अफ्रीकी सवाना घासभूमि में बारी-बारी से आने वाले गीले और सूखे मौसम के अधीन लंबी घास और छितरे हुए अकासिया या बाओबाब वृक्ष मिलते हैं।
  • भूमध्यसागरीय कठोर-पत्ती झाड़ी वनस्पति में माकी, चैपरल और माटोराल आते हैं, जिनकी पत्तियां ग्रीष्म सूखे और शीतकालीन वर्षा के अनुसार बनी होती हैं।

मुख्य बिंदु

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    प्राकृतिक वनस्पति वह पौधा आवरण है जो मुख्यतः जलवायु, मिट्टी, स्थलरूप, जल-निकास और जैविक दबाव से बिना नियोजित खेती के विकसित होता है।

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    अमेजन-कांगो भूमध्यरेखीय वर्षावन गर्म-आर्द्र जलवायु में सदाबहार, बहु-स्तरीय और अत्यधिक जैव-विविध वन बनाता है।

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    मानसूनी उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन मौसमी होता है; साल, सागौन और अन्य चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष सूखे महीनों में पत्ते गिराते हैं।

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    अफ्रीकी सवाना घासभूमि में बारी-बारी से आने वाले गीले और सूखे मौसम के अधीन लंबी घास और छितरे हुए अकासिया या बाओबाब वृक्ष मिलते हैं।

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    भूमध्यसागरीय कठोर-पत्ती झाड़ी वनस्पति में माकी, चैपरल और माटोराल आते हैं, जिनकी पत्तियां ग्रीष्म सूखे और शीतकालीन वर्षा के अनुसार बनी होती हैं।

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    समशीतोष्ण घासभूमियों के क्षेत्रीय नाम हैं: उत्तरी अमेरिका में प्रेयरी, अर्जेंटीना-उरुग्वे में पम्पास, यूरेशिया में स्टेपी और दक्षिण अफ्रीका में वेल्ड।

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    टाइगा बोरियल शंकुधारी वन में स्प्रूस, चीड़, फर और लार्च प्रमुख हैं; आर्कटिक टुंड्रा स्थायी हिममिट्टी पर वृक्षहीन काई-लाइकेन वनस्पति है।

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    पश्चिमी राजस्थान की थार उष्णकटिबंधीय कांटेदार झाड़ी वनस्पति मरुस्थलीय मरुद्भिदों का स्थानीय उदाहरण देती है, जिसमें खेजड़ी, रोहिड़ा, बबूल और विरल झाड़ियां मिलती हैं।

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प्राकृतिक वनस्पति को जलवायु, मिट्टी और स्थलरूप कैसे नियंत्रित करते हैं?

प्राकृतिक वनस्पति को तापमान, वर्षा, मिट्टी, स्थलरूप और मानव-पशु दबाव मिलकर नियंत्रित करते हैं, इसलिए एक ही अक्षांश पर भी अलग-अलग पौधा आवरण बन सकता है। भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 पर भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार देश का कुल वन और वृक्ष आवरण भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17% है। प्राकृतिक वनस्पति वह पौधा आवरण है जो नियोजित खेती के बिना उगता है, पर यह बेतरतीब आवरण नहीं होता।

मुख्य नियंत्रक कारक

  • तापमान बढ़वार-ऋतु की लंबाई तय करता है।
  • वर्षा जल उपलब्धता तय करती है।
  • मिट्टी जड़ों और पोषक तत्वों का आधार बनती है।
  • स्थलरूप तापमान और जल-निकास दोनों बदलता है।
  • मानव या पशु दबाव मूल वनस्पति को द्वितीयक झाड़ी या घासभूमि में बदल सकता है।

इसी कारण समान अक्षांश पर भी समान वनस्पति नहीं मिलती। पवनमुखी ढाल, नदी घाटी, रेतीला मरुस्थल और ऊंचा पठार नमी-संतुलन को अलग-अलग बना देते हैं। परीक्षा में इस बात को रटने की जगह कारण-परिणाम की तरह पढ़ना चाहिए: जहाँ जल और ताप साथ मिलते हैं वहाँ घना वन बन सकता है, जहाँ जल सीमित है वहाँ घास, झाड़ी या मरुद्भिद रूप मजबूत होते हैं, और जहाँ ठंड बढ़वार-ऋतु घटा देती है वहाँ शंकुधारी या टुंड्रा प्रकार आते हैं।

वैश्विक और स्थानीय उदाहरण

वनस्पति या भू-दृश्यनियंत्रण या उदाहरण
अमेजन-कांगो का भूमध्यरेखीय वर्षावनसाल भर की गर्मी और भारी वर्षा में पनपता है
सहारा की मरुद्भिद वनस्पतिदुर्लभ वर्षा और अधिक वाष्पीकरण में जीवित रहती है
मानसूनी उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वनइनके बीच आता है
अफ्रीकी सवाना घासभूमिइनके बीच आती है
यूरोप और उत्तरी अमेरिका के समशीतोष्ण पर्णपाती वनइनके बीच आते हैं
प्रेयरी-पम्पास-स्टेपी-वेल्ड समशीतोष्ण घासभूमियांइनके बीच आती हैं
टाइगा शंकुधारी वनइनके बीच आता है
आर्कटिक टुंड्रा की काई-लाइकेन वनस्पतिइनके बीच आती है
जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर की थार कांटेदार झाड़ी वनस्पतिवैश्विक मरुद्भिद वनस्पति का भारतीय मरुस्थलीय रूप है
सिरोही से उदयपुर तक अरावली ढालेंसूखे पर्णपाती टुकड़ों से पहाड़ी झाड़ी तक कम दूरी में बदलाव दिखाती हैं
खारे ज्वारीय डेल्टा के मैंग्रोवयही तर्क समझाता है
शीत आर्द्र क्षेत्रों की पीट-दलदल वनस्पतिजलभराव से अपघटन धीमा होता है
ऊंचे पर्वतों की अल्पाइन वनस्पतिऊंचाई जलवायु पट्टियों को लंबवत समेट देती है

सीमाएं और संक्रमण

वनस्पति सीमाएं तीखी रेखाएं नहीं, बल्कि संक्रमण क्षेत्र होती हैं।

  • सूखे क्षेत्र की मौसमी बाढ़ वाली घाटी घास या आर्द्रभूमि पौधों को सहारा दे सकती है।
  • आर्द्र पट्टी की चट्टानी ढाल पर झाड़ी मिल सकती है।
  • बिगड़े हुए वन-किनारे पर परिपक्व छतरी लौटने से पहले बांस, झाड़ियां या द्वितीयक चौड़ी पत्ती वाली वनस्पति उग सकती है।

किनारे इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि वे संक्रमण दिखाते हैं:

1. वनभूमि सवाना में बदलती है।

2. सवाना कांटेदार झाड़ी में बदलती है।

3. कांटेदार झाड़ी लगभग निर्जन मरुस्थल में बदलती है।

मूल वनस्पति और वर्तमान भूमि उपयोग

यही दृष्टि मूल वनस्पति और वर्तमान भूमि उपयोग को अलग करती है।

वर्तमान भूमि उपयोगपारिस्थितिक संदर्भ
पूर्व प्रेयरी पर गेहूंपुराने पारिस्थितिक सीमांतों पर चढ़ी आर्थिक परत
भूमध्यसागरीय क्षेत्र में अंगूर की खेतीपुराने पारिस्थितिक सीमांतों पर चढ़ी आर्थिक परत
कांटेदार झाड़ी में चराईपुराने पारिस्थितिक सीमांतों पर चढ़ी आर्थिक परत

सटीक वर्णन में पौधे का रूप उसके सीमित करने वाले कारक से जुड़ता है: जल, ताप, शीत, लवण, मिट्टी की हवा, ऊंचाई और उस भू-दृश्य का व्यवधान-इतिहास।

प्राकृतिक वनस्पति का अध्ययन इन्हीं नियंत्रक कारकों के संयुक्त काम को समझना है।

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संभावित प्रश्न

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1MCQगर्म-आर्द्र पट्टी में चौड़ी सदाबहार पत्तियां, बंद छत्र, लताएं और अधिपादप मिलते हैं तथा पतली मिट्टी पर पोषक चक्र तेज चलता है। यह किस वनस्पति प्रकार से मेल खाता है?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aअमेजन-कांगो भूमध्यरेखीय वर्षावनसही
  2. Bप्रेयरी-पम्पास-स्टेपी-वेल्ड समशीतोष्ण घासभूमि
  3. Cसहारा मरुस्थल की मरुद्भिद वनस्पति
  4. Dआर्कटिक टुंड्रा काई-लाइकेन वनस्पति

व्याख्या

विकल्प क सही है क्योंकि वर्ष भर गर्मी और नमी अमेजन तथा कांगो बेसिन में सदाबहार बहु-स्तरीय वर्षावन बनाती है। विकल्प ख गलत है क्योंकि समशीतोष्ण घासभूमियां मध्य अक्षांश की घास-प्रधान पट्टियां हैं। विकल्प ग गलत है क्योंकि मरुस्थलीय मरुद्भिद शुष्कता में जल-हानि घटाते हैं। विकल्प घ गलत है क्योंकि टुंड्रा स्थायी हिममिट्टी पर वृक्षहीन शीत जलवायु वनस्पति है।

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