मुख्य तथ्य

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग 22 दिसंबर 1949 से कार्यरत है और अनुच्छेद 315 से संवैधानिक दर्जा पाता है।
  • राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243ट और 243यक को पंचायत तथा नगरपालिका चुनावों से जोड़ता है।
  • राजस्थान सूचना आयोग, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अधीन द्वितीय अपील और शिकायतों का निर्णय करता है।
  • राजस्थान लोकायुक्त 1973 के राज्य कानून के अधीन लोकपाल संस्था है और उसका क्षेत्राधिकार उसी कानून से सीमित होता है।
  • राजस्थान राज्य वित्त आयोग अनुच्छेद 243झ और 243म के तहत स्थानीय निकायों के लिए कर-बंटवारे, अनुदान और वित्तीय सिद्धांतों पर सिफारिशें देता है।

मुख्य बिंदु

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    राजस्थान के राज्य निकाय संवैधानिक आयोग, वैधानिक अधिकार आयोग, लोकपाल संस्था और स्थानीय शासन संस्थाओं में बंटते हैं।

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    राजस्थान लोक सेवा आयोग 22 दिसंबर 1949 से कार्यरत है और अनुच्छेद 315 से संवैधानिक दर्जा पाता है।

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    राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243ट और 243यक को पंचायत तथा नगरपालिका चुनावों से जोड़ता है।

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    राजस्थान सूचना आयोग, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अधीन द्वितीय अपील और शिकायतों का निर्णय करता है।

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    राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग और बाल अधिकार आयोग वे संस्थाएँ हैं जहाँ लोग अपने अधिकारों के हनन की शिकायत कर सकते हैं।

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    राजस्थान लोकायुक्त 1973 के राज्य कानून के अधीन लोकपाल संस्था है और उसका क्षेत्राधिकार उसी कानून से सीमित होता है।

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    राजस्थान राज्य वित्त आयोग अनुच्छेद 243झ और 243म के तहत स्थानीय निकायों के लिए कर-बंटवारे, अनुदान और वित्तीय सिद्धांतों पर सिफारिशें देता है।

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    2011, 2012 और 2012 के राज्य कानून सेवा देने, सुनवाई और खरीद प्रक्रिया में समयबद्ध जवाबदेही तय करते हैं।

PYQ दोहराव

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राजस्थान लोक सेवा आयोग राज्य भर्ती में क्या भूमिका निभाता है?

राजस्थान लोक सेवा आयोग राज्य सेवाओं में भर्ती, पदोन्नति और सेवा मामलों पर परामर्श देने वाला प्रमुख संवैधानिक निकाय है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार आयोग ने उस वर्ष 49 प्रतियोगी परीक्षाएं और 51 स्क्रीनिंग टेस्ट कराए, यानी कुल 100 परीक्षाएं और टेस्ट

संस्थागत पहचान

  • इसका अस्तित्व 22 दिसंबर 1949 को शुरू हुआ।
  • आयोग का मुख्यालय अजमेर में है। यह सचिवालय का विभाग नहीं, बल्कि स्वतंत्र संवैधानिक आयोग है।
  • यह न्यायालय या विभाग नहीं है; यह संवैधानिक सलाहकारी निकाय है जिसकी सिफारिश नियुक्ति और सेवा प्रशासन को प्रभावित करती है, पर अंतिम आदेश सक्षम शासन प्राधिकारी जारी करता है।
  • आयोग की स्वतंत्रता संस्थागत है, निरपेक्ष नहीं।
  • परीक्षा-आधारित भर्ती, साक्षात्कार, विभागीय पदोन्नति और सेवा-नियमों पर सलाह इसकी पहचान को सामान्य कार्मिक शाखा से अलग करती है।

संवैधानिक आधार

अनुच्छेदव्यवस्था
अनुच्छेद 315संघ और प्रत्येक राज्य के लिए लोक सेवा आयोग की व्यवस्था करता है।
अनुच्छेद 316अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तथा कार्यकाल बताता है; राज्य आयोग के सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, रहता है।
अनुच्छेद 317कदाचार के आधार पर हटाने के लिए राष्ट्रपति मामला उच्चतम न्यायालय को जांच के लिए भेजता है। खंड (3) के तहत दिवालिया होने, कार्यकाल में पद के बाहर वेतन वाला काम करने या मानसिक अथवा शारीरिक अक्षमता पर राष्ट्रपति बिना इस जांच के भी हटा सकता है। राज्य आयोग के सदस्य का मामला उच्चतम न्यायालय को भेजे जाने के बाद राज्यपाल उसे राष्ट्रपति के अंतिम आदेश तक निलंबित कर सकता है।
अनुच्छेद 319बाद के पद-लाभ को सीमित करता है।
अनुच्छेद 320भर्ती, पदोन्नति, सेवा-नियम और अनुशासनात्मक मामलों में परामर्श की भूमिका बताता है।
अनुच्छेद 323प्रतिवेदन को राज्यपाल के ज़रिए विधानमंडल के सामने रखता है।

प्रशासनिक भूमिका

  • राजस्थान प्रशासन में आयोग प्रतियोगी परीक्षाओं, विभागीय पदोन्नति, राज्य सेवा में कार्यरत व्यक्ति से जुड़े दंडात्मक मामलों और राज्यपाल को दी जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट से जुड़ता है।
  • अध्यक्ष और सदस्य राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं।
  • हटाने की प्रक्रिया संवैधानिक सुरक्षा से बंधती है।
  • वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल के सामने रखकर विधायी जवाबदेही बनती है।
  • सेवा मामलों में नियम कुछ अपवाद बना सकते हैं, पर मूल ढांचा भर्ती परामर्श को रोज़मर्रा के मंत्री-नियंत्रण से अलग रखता है।
  • आयोग शासन को सलाह देता है, पर नियुक्ति आदेश जारी करने वाला विभाग या शासन ही रहता है; इसलिए परीक्षा संस्था और नियुक्ति प्राधिकारी को अलग-अलग समझना चाहिए।

भर्ती प्रवाह

चरणभूमिका
विभागमांग भेजते हैं।
आयोगचयन पद्धति बनाता है।
राज्य सरकार या संबंधित विभागअंतिम नियुक्ति आदेश जारी करता है।
  • आयोग भर्ती-नियमों और विभागीय रिक्तियों के बीच भी खड़ा है।
  • इससे राज्य सेवाओं में पक्षपात का जोखिम घटता है।
  • परीक्षा प्रश्न में अगर आयोग को न्यायालय, कार्मिक विभाग या नियुक्ति करने वाली अंतिम सत्ता बना दिया जाए, तो वह गलत होगा; आयोग का मूल काम निष्पक्ष चयन और सेवा-परामर्श है।

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1MCQ1949 में अजमेर से शुरू हुई राज्य भर्ती संस्था का संवैधानिक आधार कौन सा प्रावधान देता है?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aअनुच्छेद 315 — राज्य लोक सेवा आयोगसही
  2. Bअनुच्छेद 243ट — राज्य निर्वाचन आयोग
  3. Cअनुच्छेद 243झ — राज्य वित्त आयोग
  4. Dअनुच्छेद 280 — केंद्रीय वित्त आयोग

व्याख्या

अनुच्छेद 315 संघ और प्रत्येक राज्य के लिए लोक सेवा आयोग का संवैधानिक स्रोत है, इसलिए यह राजस्थान लोक सेवा आयोग से मेल खाता है। अनुच्छेद 243ट स्थानीय निकाय चुनावों से, अनुच्छेद 243झ पंचायत वित्त से और अनुच्छेद 280 केंद्रीय वित्त आयोग से जुड़ता है।

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