मुख्य तथ्य

  • राजस्थान के व्यक्तित्वों का इतिहास केवल नाम-सूची नहीं है; इसमें शासन, दुर्ग, युद्ध-तिथियाँ, उत्तराधिकार, संत, लेखक और 1947 के बाद के पद जुड़ते हैं।
  • मेवाड़ की परंपरा में बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल मेवाड़ से शुरुआत होती है और कुम्भा, सांगा तथा प्रताप से प्रतिरोध की रेखा बनती है।
  • मारवाड़ में राव जोधा, मेहरानगढ़, राव मालदेव, सम्मेल, जसवंत सिंह की उत्तराधिकार समस्या, अजीत सिंह और दुर्गादास राठौड़ जुड़े रहते हैं।
  • नारी-बलिदान की स्मृति पन्ना धाय और उदय सिंह द्वितीय तथा हाड़ी रानी का बलिदान जैसी घटनाओं से ठोस बनती है।
  • मीरा बाई, विजयदान देथा और रूमा देवी जैसे नाम इस विषय को राजसत्ता से आगे भक्ति, लोक-साहित्य और आजीविका तक ले जाते हैं।

मुख्य बिंदु

  1. 1

    राजस्थान के व्यक्तित्वों का इतिहास केवल नाम-सूची नहीं है; इसमें शासन, दुर्ग, युद्ध-तिथियाँ, उत्तराधिकार, संत, लेखक और 1947 के बाद के पद जुड़ते हैं।

  2. 2

    मेवाड़ की परंपरा में बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल मेवाड़ से शुरुआत होती है और कुम्भा, सांगा तथा प्रताप से प्रतिरोध की रेखा बनती है।

  3. 3

    मारवाड़ में राव जोधा, मेहरानगढ़, राव मालदेव, सम्मेल, जसवंत सिंह की उत्तराधिकार समस्या, अजीत सिंह और दुर्गादास राठौड़ जुड़े रहते हैं।

  4. 4

    नारी-बलिदान की स्मृति पन्ना धाय और उदय सिंह द्वितीय तथा हाड़ी रानी का बलिदान जैसी घटनाओं से ठोस बनती है।

  5. 5

    मीरा बाई, विजयदान देथा और रूमा देवी जैसे नाम इस विषय को राजसत्ता से आगे भक्ति, लोक-साहित्य और आजीविका तक ले जाते हैं।

PYQ दोहराव

पिछले 10 साल: 16 बार पूछा गयाकुल जुड़े PYQ: 20

यह टॉपिक 2024, 2023, 2021, 2018, 2016... में पूछा गया है। पहले नोट दोहराएँ, फिर जुड़े प्रश्न खोलें।

बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल परंपरा को मेवाड़ की शुरुआत में कैसे समझना चाहिए?

बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल परंपरा को मेवाड़ की संस्थापक स्मृति के रूप में समझना चाहिए, जहाँ शासक, वंश, चित्तौड़, अरावली और एकलिंगजी भक्ति एक साथ जुड़ते हैं। बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल मेवाड़ राजस्थान के शासक-व्यक्तित्वों की आरंभिक स्मृति हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार चित्तौड़गढ़ दुर्ग लगभग 700 एकड़ में फैला है, इसलिए मेवाड़ की आरंभिक स्मृति को केवल व्यक्ति-नाम नहीं, बल्कि दुर्ग और भू-आधार के साथ पढ़ना चाहिए।

मुख्य आधार

  • तिथि और क्षेत्र: 734 की तिथि मेवाड़ क्षेत्र में बप्पा रावल गुहिलोट से जुड़ती है।
  • राजधानी-स्मृति: चित्तौड़ या चित्तौड़गढ़ बाद की ऐतिहासिक स्मृति में पुरानी राजधानी के रूप में सामने आता है।
  • समझने का तरीका: इस बिंदु को आधुनिक उदयपुर जिले से शुरू करके नहीं समझना चाहिए।
  • वंश-परंपरा: मेवाड़ पहले ऐसी वंश-परंपरा के रूप में आता है जिसने अरावली पहाड़ियों, चित्तौड़, एकलिंगजी भक्ति और राजपूत राजनीतिक वैधता को एक स्थायी कथा में बांधा।

स्रोत-संदर्भ साथ रखें

संदर्भतथ्यउपयोग
ब्रिटानिका का विवरणगुहिलों को मेवाड़ के आसपास रखता है जब उन्होंने 940 में स्वतंत्रता का दावा किया।940 मेवाड़ में गुहिलों की बाद की स्वतंत्र शक्ति का सुदृढ़ीकरण है।
त्रेक्कानी734 की बप्पा रावल परंपरा को सुरक्षित रखता है।734 वंश-आरंभ का आधार है।

व्यक्तित्व का महत्व

  • संस्थापक स्मृति: बप्पा रावल को अकेली जीवनी की तरह नहीं, बल्कि संस्थापक स्मृति की तरह पढ़ना अधिक सुरक्षित है।
  • वंशावली-पथ: इस विषय में उनका महत्व यह है कि वे वह वंशावली-पथ खोलते हैं जिसमें राणा कुम्भा, राणा सांगा, उदय सिंह द्वितीय और महाराणा प्रताप जैसे बाद के व्यक्तित्व समझे जाते हैं।
  • जुड़े स्थान और संस्थाएँ: चित्तौड़, नागदा, एकलिंगजी और गुहिल-सिसोदिया उत्तराधिकार को जुड़े हुए स्थानों और संस्थाओं की तरह देखना चाहिए।

सावधान ऐतिहासिक वाक्य

  • बप्पा रावल प्रारंभिक गुहिल मेवाड़ परंपरा से जुड़े हैं और मेवाड़-घराने के 8वीं सदी के उदय से संबद्ध हैं।
  • दूरस्थ अभियानों पर बहुत मजबूत दावे स्रोत-सहयोग के बिना नहीं बढ़ाने चाहिए।
  • राजस्थान में यह पहला आधार बताता है कि शासक का नाम केवल सेनापति के रूप में नहीं आता। वह वंश, दुर्ग, देवस्थान और प्रजा के रक्षक के रूप में भी याद किया जाता है।

पूरा नोट खोलें

यह सार्वजनिक पृष्ठ पहला उपलब्ध खंड दिखाता है। स्टडी पैक पूरा विषय और सभी पुनरावलोकन सामग्री खोलता है।

9 और खंड पूरे नोट में हैं

स्टडी पैक खोलें

संभावित प्रश्न

अभ्यास में जाने से पहले उत्तर संरचना जाँचने के लिए इन प्रश्नों का उपयोग करें।

1MCQ8वीं शताब्दी में मेवाड़ की आरंभिक वंश-स्मृति किस व्यक्तित्व से सबसे निकट जुड़ती है?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aबप्पा रावलसही
  2. Bराव जोधा
  3. Cदुर्गादास राठौड़
  4. Dसवाई मान सिंह द्वितीय

व्याख्या

बप्पा रावल प्रारंभिक गुहिल-मेवाड़ स्मृति और 734 की परंपरा से जुड़े हैं। राव जोधा 1459 के जोधपुर से, दुर्गादास 17वीं शताब्दी के मारवाड़ उत्तराधिकार संघर्ष से और सवाई मान सिंह द्वितीय 1949 के एकीकरण चरण से जुड़े हैं।

~50 शब्द · 1 अंक