स्थापत्य, कला एवं हस्तशिल्प
मुख्य तथ्य
- 1527 का खानवा और 1576 का हल्दीघाटी मेवाड़ युद्ध-स्मृति को चित्र, लोकगाथा, स्मारक और संग्रहालय परंपरा में बदलते हैं।
- आमेर महल मान सिंह प्रथम और सोलहवीं शताब्दी की कछवाहा महल-दुर्ग वास्तुकला से जुड़ता है, जयपुर की 1727 योजना से नहीं।
- सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1727 में द्वारों, सीधी बाजार-धुरियों, चौकड़ियों और शिल्प मोहल्लों वाला नियोजित परकोटा जयपुर बसाया।
- प्रतापगढ़ की थेवा कला में बारीक काटी गई 23 कैरेट सोने की पत्ती को नरम रंगीन कांच में जड़ा जाता है, जबकि जयपुर की ब्लू पॉटरी मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज-आ...
मुख्य बिंदु
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राणा कुम्भा मेवाड़ स्थापत्य को चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, कुम्भा श्याम और विजय स्तम्भ से जोड़ते हैं।
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1527 का खानवा और 1576 का हल्दीघाटी मेवाड़ युद्ध-स्मृति को चित्र, लोकगाथा, स्मारक और संग्रहालय परंपरा में बदलते हैं।
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आमेर महल मान सिंह प्रथम और सोलहवीं शताब्दी की कछवाहा महल-दुर्ग वास्तुकला से जुड़ता है, जयपुर की 1727 योजना से नहीं।
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सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1727 में द्वारों, सीधी बाजार-धुरियों, चौकड़ियों और शिल्प मोहल्लों वाला नियोजित परकोटा जयपुर बसाया।
- 5
जैसलमेर की हवेलियों को उनके अलग संबंधों से याद रखें: नथमल जी और सलीम सिंह की हवेलियां मंत्रियों के निवास थे, जबकि पटवों की हवेली पटवा परिवार की व्यापारी पृष्ठभूमि से जुड़ी है।
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राजस्थान की चित्रशैलियों की पहचान उनके दरबार, संरक्षक, चित्रकार, क्षेत्र, विषय, सामग्री और चित्रांकन की खासियतों से करें।
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प्रतापगढ़ की थेवा कला में बारीक काटी गई 23 कैरेट सोने की पत्ती को नरम रंगीन कांच में जड़ा जाता है, जबकि जयपुर की ब्लू पॉटरी मिट्टी के बजाय क्वार्ट्ज-आधारित मिश्रण पर ग्लेज़ चढ़ाकर बनाई जाती है।
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लोक वाद्य, पहनावे से जुड़ी चीजें और चित्रित फड़ राजस्थान के शिल्प को आज भी चल रही लोक-प्रदर्शन, अनुष्ठान और सामुदायिक पहचान की परंपराओं से जोड़ते हैं।
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राजस्थान के स्थापत्य को वंशों से जोड़कर कैसे पढ़ें?
मेवाड़ की स्थापत्य-स्मृति बप्पा रावल और शुरुआती गुहिल वंश से शुरू होती है। राजस्थान सरकार की सामग्री इस विवादित परंपरा को 8वीं शताब्दी में रखती है, लेकिन किसी एक निश्चित वर्ष को पक्का तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
- बप्पा रावल मेवाड़ की शुरुआती वंश-परंपरा का संकेत हैं, किसी निश्चित वर्ष में हुई स्थापना का नहीं।
- यही शुरुआती गुहिल पृष्ठभूमि चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़ और उदयपुर की बाद की सिसोदिया-मेवाड़ वास्तुकला को समझने में मदद करती है।
- किसी स्मारक को उसके शासक वंश, स्थान, राजनीतिक संदर्भ, सामग्री और काम के साथ पढ़ें।
- UNESCO की राजस्थान के पहाड़ी किले श्रृंखला में 6 दुर्ग हैं: चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, रणथम्भौर, गागरोन, आमेर और जैसलमेर।
- परीक्षा के लिए बप्पा रावल को शुरुआती मेवाड़ वंश-परंपरा से, राणा कुम्भा को कुम्भलगढ़ और विजय स्तम्भ से, तथा बाद के मेवाड़ को प्रतिरोध, राजसत्ता और धार्मिक संरक्षण से जोड़कर याद रखें।
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1MCQमेवाड़-अरावली क्षेत्र में लगभग 36 किमी दीवार-परंपरा वाले दुर्ग के लिए कौन-सी शासक-संरक्षक जोड़ी सही है?
व्याख्या
कुम्भलगढ़ मेवाड़-अरावली का दुर्ग है जो राणा कुम्भा और लंबी दीवार-परंपरा से जुड़ता है। मेहरानगढ़ राव जोधा और जोधपुर से, जूनागढ़ राय सिंह और बीकानेर से, तथा आमेर महल जयपुर के पास मान सिंह प्रथम से जुड़ता है।
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