स्वतंत्रता-उपरांत राष्ट्र निर्माण
मुख्य तथ्य
- 1947 के बाद राष्ट्र निर्माण में संविधान, भू-एकीकरण, चुनावी लोकतंत्र और विकास योजना साथ-साथ चले।
- राजस्थान स्थानीय उदाहरण है, जहाँ मत्स्य संघ, वृहत राजस्थान और 1956 पुनर्गठन ने रियासतों को आधुनिक राज्य में बदला।
- 1947-48, 1962, 1965 और 1971 के सुरक्षा संकटों ने रक्षा नीति और विदेश नीति की दिशा बदली।
मुख्य बिंदु
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1947 के बाद राष्ट्र निर्माण में संविधान, भू-एकीकरण, चुनावी लोकतंत्र और विकास योजना साथ-साथ चले।
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राजस्थान स्थानीय उदाहरण है, जहाँ मत्स्य संघ, वृहत राजस्थान और 1956 पुनर्गठन ने रियासतों को आधुनिक राज्य में बदला।
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1947-48, 1962, 1965 और 1971 के सुरक्षा संकटों ने रक्षा नीति और विदेश नीति की दिशा बदली।
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खेती और बैंकिंग से जुड़े सरकारी कदमों ने राष्ट्रीय एकता को खाद्य सुरक्षा, कर्ज़ की बढ़ती पहुँच और सरकार के नेतृत्व वाले विकास से जोड़ा।
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आपातकाल के बाद सत्ता-परिवर्तन और गठबंधन राजनीति ने लोकतांत्रिक सुधार को राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बनाया।
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भारत में गणराज्य की शुरुआत कैसे हुई?
26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ भारत गणराज्य बना। औपनिवेशिक राज्याध्यक्ष की जगह निर्वाचित राष्ट्रपति आए और पहले से चल रही मंत्रिमंडलीय व्यवस्था लिखित गणतांत्रिक संविधान के अधीन आ गई। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार 1951-52 के पहले आम चुनाव में देशभर में 17.32 करोड़ मतदाता थे। इससे उस बड़े पैमाने का पता चलता है जिस पर संविधान की लोकतांत्रिक परीक्षा हुई।
भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और राजनीतिक स्वतंत्रता को गणतांत्रिक संवैधानिक आधार मिला।
संवैधानिक पड़ाव
| पड़ाव | तिथि/अवधि | तथ्य |
|---|---|---|
| संविधान सभा ने संविधान अपनाया | 26 नवंबर 1949 | संविधान अपनाया जा चुका था, लेकिन वह बाद में लागू हुआ। |
| संविधान लागू हुआ | 26 जनवरी 1950 | डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्रथम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और गणराज्य में राज्याध्यक्ष के रूप में गवर्नर-जनरल की जगह ली। |
| पहला आम चुनाव | 1951-52 | सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को व्यवहार में उतारा। |
| प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू | 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 | उन्होंने गणराज्य बनने से पहले और बाद में मंत्रिमंडलीय नेतृत्व दिया तथा लंबे समय तक विदेश नीति भी संभाली। |
राष्ट्र निर्माण का अर्थ
- राष्ट्र निर्माण केवल सीमाएँ तय करने का काम नहीं था।
- इसके लिए वैध केंद्र, अधिकार पाने वाले नागरिक, संसदीय जवाबदेही और संघीय संस्थाएँ भी ज़रूरी थीं।
- राष्ट्रपति, संसद, उच्चतम न्यायालय, चुनाव आयोग और मंत्रिपरिषद ने अलग-अलग लेकिन जुड़े हुए संस्थागत आधार दिए।
- विभाजन के बाद के समाज में शरणार्थी, अलग-अलग भाषायी क्षेत्र, जातिगत ऊँच-नीच और पूर्व रियासती अभिजात वर्ग शामिल थे, इसलिए सत्ता का कई संस्थाओं में बँटना ज़रूरी था।
राजस्थान में परिवर्तन
- राजस्थान में यह परिवर्तन पूर्व रियासतों के निर्वाचित संस्थाओं के दायरे में आने से दिखा।
- जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और छोटी रियासतें अब संधि-आधारित राजसत्ता के बजाय समान नागरिकता के ढाँचे में आईं।
- दिल्ली की संवैधानिक व्यवस्था राजस्थान को रियासती शासन से निकालकर एक ही संविधान के तहत नागरिकता की ओर ले गई।
- राजस्थान की शुरुआती राजनीति में जागीरदारों, किसानों, नगर व्यापारियों और जनजातीय समुदायों को एक ही नागरिक व्यवस्था में लाना पड़ा।
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1MCQइन राष्ट्र-निर्माण घटनाओं को कालक्रम में रखिए: संविधान लागू होना, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, जनता सरकार, बांग्लादेश आत्मसमर्पण।
व्याख्या
संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। बैंक राष्ट्रीयकरण 19 जुलाई 1969 को हुआ, बांग्लादेश आत्मसमर्पण 16 दिसंबर 1971 को हुआ और मोरारजी देसाई मार्च 1977 में प्रधानमंत्री बने। ख, ग और घ में कम-से-कम एक निश्चित तिथि उलट जाती है।
~50 शब्द · 1 अंक
